केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इस समय 8वें वेतन आयोग को लेकर काफी चर्चा हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में कितना इजाफा होगा। माना जा रहा है कि इस बार वेतन वृद्धि का सबसे अहम आधार फिटमेंट फैक्टर होगा, जिसके जरिए नई बेसिक सैलरी तय की जाएगी।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय फार्मूला होता है, जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी और पेंशन को बढ़ाने के लिए करता है। आसान शब्दों में कहें तो वर्तमान वेतन को फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।
7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसके बाद कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी। इसी वजह से अब सभी की नजर 8वें वेतन आयोग के संभावित फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हुई है।
8वें वेतन आयोग में कितना हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?
सरकार की ओर से अभी तक फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 2.28 से 3.83 के बीच रह सकता है। यदि ऊंचा फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
जानकारी के अनुसार, 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। ऐसे में आयोग की सिफारिशें लागू होने तक कर्मचारियों को एरियर का भी लाभ मिल सकता है।
डीए होगा जीरो?
वर्तमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों को करीब 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा है। हाल ही में सरकार ने इसमें 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। लेकिन नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद डीए को शून्य कर दिया जाता है और फिर नई दरों से इसकी गणना शुरू होती है।
11 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा
8वें वेतन आयोग की मांग लंबे समय से की जा रही थी। सरकार ने पिछले साल नवंबर में आयोग का गठन किया था और इसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
आयोग लगातार अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और अन्य समूहों से सुझाव ले रहा है। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों से करीब 11 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा।
भारत में कब शुरू हुआ था पहला वेतन आयोग?
भारत में पहला वेतन आयोग साल 1946 में लागू किया गया था। इसके बाद लगभग हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया जाता रहा है, ताकि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन संरचना को समय के अनुसार अपडेट किया जा सके।