मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने घोषणा की है कि उसने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सभी जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते की शर्तों का पालन करने में विफल रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और कमजोर हुआ है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद इस समुद्री मार्ग पर व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी। हालांकि, हालिया घटनाक्रमों ने स्थिति को फिर से तनावपूर्ण बना दिया है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बढ़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तीन महीने से अधिक समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में बैठक कर रहे हैं।
हालांकि, ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की शुरुआती शर्तों का उल्लंघन किया है। इसी कारण उसने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद करने का फैसला लिया है।
अमेरिका ने खारिज किए ईरान के दावे
दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण संबंधी दावों को सिरे से नकार दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान के साथ स्थायी समाधान नहीं निकला तो अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने जैसे कदमों पर विचार कर सकता है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। एजेंसी का कहना है कि यह दौरा नए वार्ता दौर की शुरुआत के लिए नहीं, बल्कि पहले से हुए समझौते को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए है।
स्विट्जरलैंड में जारी है कूटनीतिक गतिविधियां
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल बर्गेनस्टॉक के लिए रवाना हो चुका है।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं, जहां वे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तकनीकी स्तर की चर्चाओं में भाग लेंगे।
लेबनान में सैन्य कार्रवाई को बताया समझौते का उल्लंघन
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के शीर्ष सैन्य कमान मुख्यालय खातम अल-अंबिया ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने युद्धविराम समझौते की पहली शर्त का स्पष्ट उल्लंघन किया है। विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान में जारी इजरायली सैन्य अभियानों को समझौते की भावना के खिलाफ बताया गया है।
मुख्यालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा युद्ध समाप्ति समझौते के प्रावधानों का पालन नहीं करने और लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियों को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों के लिए बंद किया जा रहा है।
18 जून को हुआ था ऐतिहासिक समझौता
18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच डिजिटल माध्यम से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते में दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई समाप्त करने, भविष्य में बल प्रयोग से बचने और तनाव कम करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
समझौते के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम भी लागू किए थे। इसके तहत सभी जहाजों को पहले से पंजीकरण, आवश्यक अनुमति और बीमा संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य किया गया था।
इन नियमों की निगरानी के लिए नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और सुचारु व्यावसायिक शिपिंग सुनिश्चित करना था।
अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त, लेकिन युद्धपोत तैनात
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों के आसपास की समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक जहाज की आवाजाही में फिलहाल कोई बाधा नहीं डाली जा रही है।
हालांकि, क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी जारी रहेगी ताकि समझौते की शर्तों के पालन पर नजर रखी जा सके और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।