US-Iran Conflict: अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य हमला, कई ठिकानों को बनाया निशाना

Saroj kanwar
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अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय पहले तक सुलह की उम्मीदें दिखाई दे रही थीं, लेकिन हालात ने एक बार फिर करवट ले ली है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले फिर से शुरू कर दिए हैं। बुधवार रात अमेरिकी वायुसेना ने ड्रोन और मिसाइलों की मदद से ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

जानकारी के मुताबिक, इन हमलों का फोकस उन ठिकानों पर था जिन्हें अमेरिका अपने सैनिकों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा मानता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इस दौरान अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन भी मार गिराए, जिन्हें संभावित सुरक्षा जोखिम के रूप में देखा जा रहा था।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा

पिछले कुछ समय से होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से इसी समुद्री मार्ग के आसपास की गतिविधियों को ध्यान में रखकर की गई है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिका का दावा है कि ईरान की सैन्य गतिविधियाँ और ड्रोन मूवमेंट इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।

तीन महीने से जारी संघर्ष

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले लगभग 90 दिनों से लगातार बना हुआ है। बताया जाता है कि इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई के बाद हुई थी। इस दौरान भारी जानमाल का नुकसान हुआ है और हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।

इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

शांति वार्ता के बीच फिर भड़का विवाद

दिलचस्प बात यह है कि यह नया सैन्य कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और शांति की दिशा में बातचीत चल रही थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि संभावित समझौते के तहत ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संचालन संभाल सकते हैं।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहेगा और वहां किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।

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