उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब होंगे, यह सवाल अभी भी बना हुआ है। इसको लेकर लगातार तरह-तरह की अटकलें और अफवाहें भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि राज्य सरकार विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव की दिशा में कदम बढ़ाएगी, लेकिन हाल ही में सरकार की एक बड़ी कार्रवाई ने चुनाव की संभावनाओं को फिर से मजबूत कर दिया है।
सरकार ने पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण तय करने हेतु एक समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का फैसला लिया है। इस कदम को चुनाव प्रक्रिया की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार द्वारा आयोग के गठन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है।
क्यों जरूरी हुआ नया आयोग?
पंचायत चुनाव को लेकर ओबीसी आरक्षण लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। पहले भी निकाय चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं। अदालत ने साफ कहा था कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
इसी शर्त को पूरा करने के लिए सरकार को यह साबित करना होगा कि स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग की वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति क्या है। इसी वजह से योगी सरकार ने पंचायत चुनाव से पहले एक अलग और विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का निर्णय लिया है।
आयोग की संरचना और जिम्मेदारी
इस आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे। इसकी अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ चार अन्य सदस्य भी शामिल किए गए हैं।
इनमें रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा, साथ ही सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह शामिल हैं। यह समिति पूरे राज्य में सर्वे कर आरक्षण से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
चुनाव कब हो सकते हैं?
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखें अब पूरी तरह से आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेंगी। अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो से तीन महीने का समय लग सकता है। सरकार की योजना के अनुसार, यदि सब कुछ तय समय पर हुआ तो अक्टूबर 2026 तक पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है।