अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में करीब 2 फीसदी की तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को भी गोल्ड की कीमतों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल का 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करना माना जा रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक महंगाई (Inflation) को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने या आगे बढ़ाने की संभावना मजबूत हो गई है।
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, सोने की चमक हुई फीकी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.1 फीसदी की गिरावट के साथ 4,042.77 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बुधवार को सोना दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, लेकिन वहां से अब तक इसमें 120 डॉलर से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
वहीं, अमेरिकी बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर भी लगभग 0.1 फीसदी फिसलकर 4,045.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, सप्ताहभर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सोना अभी भी करीब 0.6 फीसदी की बढ़त के साथ साप्ताहिक लाभ दर्ज करने की स्थिति में है।
मिडिल ईस्ट तनाव ने बढ़ाया कच्चे तेल का भाव
ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल के पीछे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अहम कारण है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाल सागर में यमन के लड़ाकों द्वारा सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और हूती लड़ाकों को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। इस घटनाक्रम के बाद गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 7 फीसदी उछल गया और मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। युद्ध शुरू होने के बाद यह कच्चे तेल की सबसे बड़ी एकदिवसीय तेजी में शामिल है।
ब्याज दरों की चिंता से क्यों घटता है सोने का आकर्षण?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर को मजबूती मिली है। अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड जनवरी 2025 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
बाजार की उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, CME FedWatch Tool के अनुसार सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 81 फीसदी आंकी जा रही है।
जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तब निवेशकों का रुझान ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता है। ऐसे में बिना ब्याज वाला निवेश माना जाने वाला सोना अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो जाता है और उसकी कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
भारत में सोने और चांदी के ताजा भाव
भारतीय सर्राफा बाजार के अनुसार 24 कैरेट सोने का भाव फिलहाल 1,43,470 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
- 17 जुलाई 2026 को सोना 1,41,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी एक सप्ताह में इसमें करीब 1.32 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
- 24 जून 2026 के 1,41,440 रुपये के मुकाबले इसमें लगभग 1.44 फीसदी की मजबूती आई है।
- यदि पिछले एक साल की बात करें तो 24 जुलाई 2025 को सोने का भाव 99,220 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस हिसाब से एक वर्ष में सोने की कीमत करीब 44.60 फीसदी बढ़ चुकी है।
चांदी की कीमत भी ऊंचे स्तर पर
999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 2,19,760 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है।
- एक सप्ताह पहले इसका भाव 2,16,840 रुपये था, यानी करीब 1.35 फीसदी की तेजी आई।
- एक महीने पहले चांदी 2,13,770 रुपये प्रति किलो थी, जिसके मुकाबले इसमें लगभग 2.80 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
- पिछले वर्ष 24 जुलाई 2025 को चांदी का भाव 1,15,390 रुपये प्रति किलोग्राम था। यानी एक साल में चांदी करीब 90.45 फीसदी महंगी हो चुकी है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक बाजार में सोने की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर रहेगी। यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है और केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपनाते हैं, तो निकट अवधि में सोने में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है।