नई दिल्ली। पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब खराब CIBIL Score होने पर भी किसानों को फसल ऋण मिलने में दिक्कत नहीं आएगी। हालांकि फिलहाल यह सुविधा सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों को दी जाएगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों के क्रॉप लोन को उनके सिबिल स्कोर से न जोड़ा जाए। खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को केवल खराब क्रेडिट स्कोर की वजह से ऋण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने बैंक मुख्यालयों से लेकर स्थानीय शाखाओं तक इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों ने भी इस फैसले पर सहमति जताई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को खेती के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
किसानों को बड़ी राहत
आमतौर पर बैंक और वित्तीय संस्थान लोन मंजूर करने से पहले व्यक्ति की भुगतान क्षमता जांचने के लिए CIBIL Score देखते हैं। लेकिन अब महाराष्ट्र में किसानों के फसल ऋण के मामलों में इस नियम में राहत दी जाएगी। इससे हजारों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पहले खराब क्रेडिट रिकॉर्ड के कारण लोन मिलने में परेशानी होती थी।
30 जून से पहले कर्ज माफी का दावा
बैठक के दौरान राज्य सरकार ने कृषि ऋण माफी को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही अपनी घोषित कर्ज माफी योजना को लागू करेगी। कैबिनेट स्तर पर इस पर चर्चा हो चुकी है और जैसे ही सभी जिलों से आंकड़े प्राप्त हो जाएंगे, किसानों के ऋण 30 जून से पहले माफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
महाराष्ट्र में इस बार खरीफ फसलों का रकबा लगभग 152 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। इनमें करीब 88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन और कपास की खेती की जाएगी। ऐसे में किसानों के लिए समय पर लोन और अन्य सुविधाएं बेहद अहम मानी जा रही हैं।
मानसून को लेकर भी सरकार सतर्क
मौसम विभाग के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि जून से सितंबर के बीच बारिश धीरे-धीरे कम हो सकती है। इसी वजह से राज्य सरकार खरीफ सीजन के दौरान संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों में जुटी हुई है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
खाद डीलरों पर भी सरकार सख्त
मुख्यमंत्री ने उर्वरक विक्रेताओं को भी कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई डीलर किसानों को डीएपी या यूरिया के साथ जबरन अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसान को केवल वही उत्पाद खरीदने की स्वतंत्रता होगी जिसकी उसे जरूरत है। नियमों का उल्लंघन करने वाले 400 से अधिक उर्वरक डीलरों के लाइसेंस पहले ही निलंबित या रद्द किए जा चुके हैं।