PM Awas Yojana: यूपी के इन लोगों को मिलेगा पक्का घर, सरकार ने दी मंजूरी

Saroj kanwar
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नई दिल्लीः अगर आपके पास अपना घर नहीं और गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे तो चिंता ना करें. सरकार (government) आपका पक्का घर का सपना पूरा करेगी, जिसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उत्तर प्रदेश में पीएम आवास (pmay) चाहने वाले लोगों की बल्ले-बल्ले होने जा रही है. पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण घटक के अंतर्गत 55 जिलों के 225 नगर निकायों के लिए कुल 63433 नए आवासों की डीपीआर (dpr) को स्वीकृति दी गई है.

सरकार की इंस मंजूरी के बाद लोगों के चेहरे पर उत्साह बना हहुआ है. मुख्य सचिव एस.पी गोयल की अध्यक्षता में पीएम आवास योजना 2.0 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरी और निगरानी समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है.

बैठक में लिया गया फैसला

आयोजित बैठक में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बड़ा निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि भागीदारी में किफायती आवास घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजना को समय रहते पूरा कर लिया जाए. बैठक में जानकारी दी गई कि पीएम आवास योजना-शहरी के भागीदारी में किफायती आवास घटक की 12 परियोजनाओं में केंद्रांश की आगामी किस्त प्राप्त करने के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटरिंग रिपोर्ट के सापेक्ष तैयारी की गई है.

एटीआर पर स्वीकृति प्रदान की गई है. इस स्वीकृति के बाद इस योजना के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण घटक के अंतर्गत कुल स्वीकृत आवासों की संख्कया 368138 हो जाएगी. बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास श्री पी. गुरु प्रसाद समेत अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे हैं. पीएम आवास योजना भारत सरकार की एक प्रमुख योजना भी है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए 2015 में आरंभ की गई थी.

योजना को लेकर नई व्यवस्था

जानकारी के लिए बता दें कि बीते साल अप्रैल महीने में पीएम आवासा योजना को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई थी. पीएम आवास योजना शहरी-दो के मकानों की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है. जांच में गुणवत्ता सही होने पर योजना की दूसरी किस्त का पैसा जारी होगा. किसी वजह से गुणवत्ता में कमी आई तो दूसरी किस्त का पैसा रोक दिया जाएगा.

लाभार्थी निर्माण घटक योजना में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है. राज्य मिशन निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला नगरीय विकास अभिकरणों को विस्तृत रूप से निर्देश भी दिए गए थे. इसके अनुसार, राज्य स्तर पर थर्ड पार्टी क्वालिटी मानिटरिंग एजेंसियों का चयन जब तक नहीं होगा तब तक जिलों में परियोजना निदेशक की अध्यक्षता में बनी तकनीकी टीम द्वारा गुणवत्ता का सत्यापन किया जाना है.

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