Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की तारीख को लेकर खत्म हुआ कंफ्यूजन, जानें कब पड़ेगी यह दुर्लभ पूर्णिमा

Saroj kanwar
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ज्येष्ठ महीने की आने वाली पूर्णिमा इस बार अधिक मास के कारण और भी विशेष मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग है, जिसमें भक्त व्रत रखते हैं, सत्यनारायण भगवान की कथा सुनते हैं और पितरों के लिए दान-पुण्य करते हैं।

पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान है और इसे माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी माता रात्रि के समय भक्तों की स्थिति का अवलोकन करने पृथ्वी पर आती हैं। साथ ही यह तिथि चंद्र दोष शांति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं के साथ अत्यंत तेजस्वी रूप में होता है, इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से कुंडली में चंद्र दोष शांत होता है और मानसिक शांति मिलती है, क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक माना जाता है।

इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा अधिक मास के दौरान पड़ रही है, जो इसे और भी विशेष बनाता है। अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। ऐसे में इस अवधि की पूर्णिमा को “ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा” कहा जाएगा। उज्जैन के विद्वानों के अनुसार यह दिन अत्यंत पुण्यकारी माना गया है और इस अवसर पर स्नान, दान और पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है।

हालांकि इस बार तारीख को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की सही तिथि

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा इस प्रकार रहेगी:

  • तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026, शनिवार (सुबह 11:57 बजे)
  • तिथि समाप्त: 31 मई 2026, रविवार (दोपहर 2:14 बजे)

ऐसे में व्रत 30 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा, जबकि स्नान और दान का विशेष पुण्य 31 मई 2026, रविवार को प्राप्त होगा। इस दिन चंद्रोदय शाम लगभग 7:36 बजे होगा।

धार्मिक महत्व और मान्यताएं

इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध करने से विशेष पुण्य मिलता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पूजा विधि (सरल रूप में)

  • सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें
  • संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें
  • घर और पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल छिड़कें
  • लाल कपड़े पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्थापना करें
  • दीप, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें
  • विष्णु चालीसा और कथा का पाठ करें
  • प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को दान दें
  • इस दिन तामसिक भोजन और विवादों से बचें

यह पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसे पुण्य अर्जित करने का विशेष अवसर माना जाता है।

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