नई दिल्ली: जून 2026 में सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शेयर बाजार के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे कीमती धातुओं के भाव लगातार नीचे फिसलते रहे।
सोमवार को भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड और सिल्वर दोनों दबाव में कारोबार करते नजर आए, जबकि भारतीय वायदा बाजार में भी इनके दाम कमजोर रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में आए बदलाव और निवेशकों के सुरक्षित निवेश से दूरी बनाने के कारण यह दबाव बना हुआ है।
क्यों आई सोने-चांदी में गिरावट?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से मिले सकारात्मक आर्थिक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इससे शेयर बाजारों में निवेश बढ़ा और सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग कमजोर हुई। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों ने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला।
भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से भी निवेशकों का रुझान जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ा है। ऐसे माहौल में सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग घटने से इनके दाम नीचे आए।
घरेलू बाजार पर भी पड़ा असर
वैश्विक बाजार की कमजोरी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ सप्ताह से लगातार कमजोर रुख के कारण निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव जारी रहता है, तो घरेलू कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा समय में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि कोई निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करता है, तो कीमतों में आई गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि, अल्पकालिक निवेश करने वालों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
आगे कैसी रह सकती है चाल?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख, डॉलर इंडेक्स और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता दोबारा बढ़ती है, तो कीमती धातुओं में खरीदारी लौट सकती है। वहीं, मजबूत आर्थिक संकेत जारी रहने पर कीमतों पर दबाव कुछ समय और बना रह सकता है.