Gold-Silver Price: सोना ₹9400 और चांदी ₹17000 तक उछली, अब खरीदें या करें इंतजार? एक्सपर्ट ने बताया

Saroj kanwar
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नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और भारत में फेस्टिव सीजन की दस्तक के बीच सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह में सोने का भाव करीब 9,400 रुपये, जबकि चांदी की कीमत 17,000 रुपये से अधिक चढ़ चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों और खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा स्तर पर Gold-Silver खरीदना सही रहेगा या कुछ समय इंतजार करना चाहिए?

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों कीमती धातुओं में फिलहाल मजबूत तेजी बनी हुई है, लेकिन इतनी तेज बढ़त के बाद कभी भी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। ऐसे में बिना सोचे-समझे ऊंचे भाव पर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है।

MCX पर सोने का आज क्या भाव है?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 0.27 फीसदी यानी 417 रुपये की बढ़त के साथ 1,52,237 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,52,999 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जबकि इसका निचला स्तर 1,51,461 रुपये रहा।

अगर पिछले कारोबारी सप्ताह की शुरुआत से तुलना करें तो 4 अगस्त को अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का सोना करीब 1,43,559 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला था। यानी एक सप्ताह के भीतर इसकी कीमत में करीब 9,000 रुपये से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है और भाव अब 1.53 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया है।

चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार

चांदी की कीमतों में भी जोरदार तेजी जारी है। MCX पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.82 फीसदी यानी 1,899 रुपये बढ़कर 2,33,365 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कारोबारी सत्र में चांदी ने 2,31,466 रुपये का निचला स्तर और 2,31,660 रुपये का ऊपरी स्तर दर्ज किया।

4 अगस्त को सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,18,143 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर खुली थी। इस हिसाब से देखें तो महज एक सप्ताह में चांदी की कीमत में 15,000 रुपये से ज्यादा का उछाल आया है। मौजूदा समय में इसका भाव 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच चुका है।

सोने-चांदी में क्यों आई इतनी तेजी?

कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। स्पॉट गोल्ड 4,400 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी का भाव 64 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना हुआ है।

इस तेजी की शुरुआत अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट जारी होने से पहले ही हो गई थी। उस समय सोने को कच्चे तेल की नरम कीमतों और कमजोर अमेरिकी डॉलर से सपोर्ट मिला। इसके बाद अमेरिकी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आने पर गोल्ड की कीमतों को और मजबूती मिली।

कमजोर अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,421 डॉलर प्रति औंस के सात सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया। जनवरी के बाद यह सोने का सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन भी रहा। खास बात यह है कि गोल्ड ने 4,000 से 4,200 डॉलर प्रति औंस की अपनी पुरानी ट्रेडिंग रेंज को भी पार कर लिया।

चांदी की चाल इससे भी तेज रही। कारोबार के दौरान इसका भाव 65 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई, लेकिन सप्ताह के आधार पर चांदी दोहरे अंकों की बढ़त के साथ बंद हुई।

अमेरिकी जॉब्स डेटा ने बढ़ाई सोने की चमक

अमेरिका से जारी रोजगार के आंकड़े बाजार की उम्मीदों की तुलना में काफी कमजोर रहे। जुलाई में करीब 80,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन इसके उलट नौकरियों में 23,000 की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, जून के आंकड़े को भी संशोधित करके महज 20,000 कर दिया गया।

अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी रही। हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आंकड़ा मजबूत हायरिंग की तस्वीर पेश करने के बजाय लेबर फोर्स में कम भागीदारी की ओर इशारा करता है।

कमजोर रोजगार आंकड़ों का असर अमेरिकी डॉलर पर भी पड़ा। डॉलर इंडेक्स 99.5 से नीचे चला गया, जबकि ट्रेजरी यील्ड में भी गिरावट आई। सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों के स्थिर रहने की संभावना अब 56 फीसदी आंकी जा रही है, जो इससे पहले 45 फीसदी थी।

अब आगे क्या होगा Gold-Silver का रुख?

आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय करने में अमेरिका के महंगाई से जुड़े आंकड़ों की अहम भूमिका होगी। बाजार की नजर अब US CPI और PPI डेटा पर है।

अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो इससे सोने और चांदी में तेजी को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, अगर महंगाई अपेक्षा से ज्यादा रहती है तो बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

यानी मौजूदा समय में Gold-Silver Price लगातार मजबूत स्थिति में है, लेकिन तेज बढ़त के बाद अचानक गिरावट का जोखिम भी बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को ऊंचे स्तर पर एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय बाजार की आगे की दिशा और अपनी निवेश जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

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