अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सोने और चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। इसका सीधा प्रभाव सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। मंगलवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में हल्की मजबूती बनी रही।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
अमेरिकी कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 2 प्रतिशत तक महंगा हो गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन लगातार ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव भी बनाती हैं।
बाजार को अब यह आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सोने की चमक फिलहाल थोड़ी फीकी पड़ती नजर आ रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी का ताजा भाव
ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 0.6 प्रतिशत गिरकर 4,544.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में हल्की तेजी देखने को मिली और यह 4,545.60 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
इसके अलावा यूएस कॉमेक्स पर सोना 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,538.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई और स्पॉट सिल्वर 0.8 प्रतिशत गिरकर 77.42 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट देखने को मिली। प्लैटिनम 1,958.18 डॉलर प्रति औंस और पैलेडियम 1,389.68 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
भारत में 10 ग्राम सोने का ताजा रेट
बुलियन एसोसिएशन के अनुसार, भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 159,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बनी हुई है। वहीं चांदी का भाव 277,130 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
अगर पिछले एक सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो सोने की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है और इसकी तेजी 1 प्रतिशत से भी कम रही है। हालांकि चांदी ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है और इसमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां सोने-चांदी की दिशा तय करेंगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग फिर तेज हो सकती है। वहीं ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी सर्राफा बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।