Gold Rate Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार (26 जून) को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बढ़ती संभावनाएं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला।
भारतीय समयानुसार 0247 GMT तक स्पॉट गोल्ड 0.9% की गिरावट के साथ 3,991.49 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1% फिसलकर 4,007.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए। चांदी में भी भारी बिकवाली देखने को मिली और स्पॉट सिल्वर 3.2% टूटकर 56.01 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
$4,000 के अहम स्तर से नीचे फिसला सोना
इस सप्ताह की गिरावट के बाद नवंबर 2025 के बाद पहली बार सोना मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे पहुंच गया। जनवरी 2026 में बनाए गए अपने रिकॉर्ड हाई 5,594.82 डॉलर प्रति औंस की तुलना में सोना अब करीब 29% तक टूट चुका है। वहीं पूरे सप्ताह में इसकी कीमतों में लगभग 4% की गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
लगातार चौथे सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहा गोल्ड
कीमती धातुओं के लिए यह लगातार एक और कमजोर सप्ताह साबित हो रहा है। सोना लगातार चौथे सप्ताह गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति पर टिकी हुई है, क्योंकि हालिया महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को बदल दिया है।
अमेरिका में महंगाई बढ़ने से बढ़ा दबाव
25 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में मई के दौरान महंगाई दर तीन वर्षों में पहली बार 4% के ऊपर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में आई तेजी रही। महंगाई के मजबूत आंकड़ों ने इस संभावना को और बढ़ा दिया कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और वृद्धि कर सकता है।
फेड अधिकारियों ने भी दिए सख्त संकेत
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने भी महंगाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने कहा कि सर्विस सेक्टर में कुछ राहत जरूर दिख रही है, लेकिन महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वहीं न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स का कहना है कि महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है।
तीन बार रेट हाइक की उम्मीद
CME FedWatch के अनुसार अब बाजार को उम्मीद है कि इस वर्ष फेडरल रिजर्व तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। खासकर सितंबर में दरें बढ़ने की संभावना पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई है। ब्याज दरों में वृद्धि होने पर सोना और चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट देने वाले निवेश विकल्पों की मांग आमतौर पर कमजोर पड़ जाती है।
मजबूत डॉलर भी बना बड़ी वजह
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे सप्ताह मजबूती की ओर बढ़ रहा है। डॉलर मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित होती है और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
पश्चिम एशिया का तनाव भी चिंता का कारण
भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। एक जहाज पर हमले की घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के एस्कॉर्ट ऑपरेशन रोक दिए। इससे अमेरिका और ईरान के बीच बने नाजुक शांति समझौते को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा हो गई हैं।
अब PCE महंगाई डेटा पर नजर
निवेशक अब अमेरिका के आगामी PCE Inflation Data का इंतजार कर रहे हैं। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व की अगली नीति का संकेत दे सकती है और सोने-चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
चीन से भी कमजोर हुई मांग
मई महीने में हांगकांग के रास्ते चीन का नेट गोल्ड आयात करीब 38% घट गया। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल चीन की ओर से कमजोर फिजिकल डिमांड भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाला बड़ा कारण माना जा रहा है।
क्या आगे और गिरेंगे सोने-चांदी के दाम?
पृथ्वीराज कोठारी की राय
ऋद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि फिलहाल बुलियन बाजार पर कई वैश्विक कारकों का एक साथ असर दिखाई दे रहा है। इनमें फेड का सख्त रुख, येन कैरी ट्रेड्स का खत्म होना और जोखिम वाले एसेट्स में कमजोरी शामिल है।
उनके मुताबिक सोना तकनीकी रूप से 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल से नीचे निकल चुका है। यदि बिकवाली जारी रहती है तो इसकी कीमत 3,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं चांदी 60 डॉलर के स्तर से नीचे आने के बाद अब 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास सपोर्ट तलाश सकती है। हालांकि ओवरसोल्ड स्थिति के कारण अल्पकाल में शॉर्ट कवरिंग रैली भी देखने को मिल सकती है।
कॉलिन शाह का क्या कहना है?
कामा ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह का मानना है कि मौजूदा गिरावट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए नकारात्मक संकेत नहीं है। उनके अनुसार यह केवल बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल का असर है।
उन्होंने कहा कि मजबूत डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण फिलहाल सोना और चांदी दबाव में हैं। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव कुछ समय तक जारी रह सकता है, लेकिन इससे लंबी अवधि की संभावनाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
शाह का मानना है कि भारत जैसे देशों में जब भी सोने की कीमतों में गिरावट आती है तो फिजिकल खरीदारी बढ़ जाती है। इसलिए मौजूदा कमजोरी को एक सामान्य करेक्शन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि लंबे समय के ट्रेंड में बदलाव के रूप में। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में सोने और चांदी के लिए लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत बने हुए हैं।