Gold Rate: ₹1.43 लाख के पार पहुंचा सोना, क्या अब 1 लाख रुपये तक गिरेंगे दाम? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Saroj kanwar
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Gold Price Prediction: पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी ने आम लोगों के लिए इसकी खरीदारी मुश्किल बना दी है। साल की शुरुआत में कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिससे उम्मीद जगी थी कि गोल्ड रेट में बड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और आज भी कई खरीदार इस इंतजार में हैं कि दाम कम हों तो निवेश या खरीदारी करें। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में सोना सस्ता होगा?

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोना

अप्रैल 2025 तक 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1 लाख के स्तर को पार नहीं कर पाई थी। लेकिन इसके बाद बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कुछ समय के लिए कीमतें करीब ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं। पिछले कारोबारी सत्र में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो इसकी मजबूत मांग को दर्शाता है।

क्या 2026 में सोने के दाम गिरेंगे?

बाजार विशेषज्ञों और रिसर्च एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल बेहद कम है।

ऑगमोंट की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी के अनुसार, मौजूदा हालात में सोने का भाव घटकर ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचना बेहद मुश्किल दिखाई देता है। उनका कहना है कि निवेशकों की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने में लगातार दिलचस्पी बनी हुई है।

किस दायरे में रह सकती हैं कीमतें?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के दौरान सोने की कीमतें मुख्य रूप से ₹1.40 लाख से ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम या उससे ऊपर के स्तर पर बनी रह सकती हैं।

हालांकि, बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण समय-समय पर 5% से 15% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। लेकिन इसे सामान्य करेक्शन माना जाएगा, न कि बड़े मार्केट क्रैश का संकेत।

किन परिस्थितियों में सस्ता हो सकता है सोना?

विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट तभी संभव है जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव हों। इनमें प्रमुख कारण शामिल हैं—

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती आना।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखना।
  • दुनिया भर में भूराजनीतिक तनाव कम होना।
  • निवेशकों का सोने की बजाय अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख करना।

यदि ये सभी परिस्थितियां एक साथ बनती हैं, तभी सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है और कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बनी बड़ी वजह

दुनियाभर के कई केंद्रीय बैंक लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। यह लगातार बनी हुई मांग भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

अगर भविष्य में केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीदना कम कर दें, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है।

क्या अभी खरीदें या इंतजार करें?

विशेषज्ञों की राय है कि केवल सबसे कम कीमत का इंतजार करना निवेशकों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, सोने में 10% से 20% तक का उतार-चढ़ाव पहले भी सामान्य रहा है। इसलिए सिर्फ किसी तय कीमत का इंतजार करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना अधिक समझदारी वाला फैसला हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

यदि आप सोने में निवेश या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो एकमुश्त निवेश करने के बजाय समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदारी करना बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और औसत खरीद मूल्य भी संतुलित रहता है।

साथ ही, बाजार की अफवाहों या छोटी अवधि की खबरों के आधार पर जल्दबाजी में खरीदने या बेचने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना बेहद कम है। जब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक हालात में बड़े बदलाव नहीं आते, तब तक सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं। ऐसे में केवल ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर का इंतजार करते रहना अधिकांश निवेशकों के लिए व्यावहारिक रणनीति नहीं माना जा रहा है।

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