FD में अभी निवेश करें या RBI के ब्याज दर फैसले का इंतजार? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Saroj kanwar
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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हालिया तेजी ने एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके चलते फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले लोग इस दुविधा में हैं कि क्या मौजूदा ब्याज दरों पर अभी निवेश करना सही रहेगा या फिर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति बैठक का इंतजार करना बेहतर होगा।

RBI की अगली पॉलिसी से क्या उम्मीदें हैं?

अधिकांश आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि RBI अपनी आगामी मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में रेपो रेट या नीतिगत रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। वैश्विक स्तर पर, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल RBI ‘वेट एंड वॉच’ की नीति पर काम कर रहा है ताकि महंगाई और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

महंगाई और ब्याज दरों पर RBI का संभावित रुख

CRISIL के चीफ इकॉनमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में RBI द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है। उनके अनुसार, अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है या और बढ़ता है, तो इसका असर महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल CPI आधारित महंगाई और कोर इन्फ्लेशन दोनों ही RBI के तय संतोषजनक दायरे में बने हुए हैं, जिससे नीति में स्थिरता की संभावना बढ़ जाती है।

Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन का भी मानना है कि केंद्रीय बैंक अभी महंगाई, लिक्विडिटी और समग्र आर्थिक स्थिति पर नजर रखते हुए सावधानीपूर्वक कदम उठाएगा।

RBI के बयान पर बाजार की नजर

EY India के टैक्स और आर्थिक नीति समूह के पार्टनर रजनीश गुप्ता के मुताबिक इस बार बाजार की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर ही नहीं, बल्कि RBI के बयान और उसके रुख पर भी होगी।

उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक को यह संकेत देना जरूरी होगा कि वह महंगाई को लेकर सतर्क है, लेकिन साथ ही बाजार में अनावश्यक घबराहट भी न फैले। हालांकि, जून की MPC बैठक तक आर्थिक हालात में बदलाव संभव है।

FD निवेशकों के लिए क्या रणनीति अपनाएं?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि मौजूदा समय में FD की ब्याज दरें अभी भी आकर्षक स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में केवल भविष्य में संभावित दरों के बदलाव का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

BankBazaar के CEO आदिल शेट्टी का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि दरें स्थिर रहती हैं, तो केवल अगली बैठक का इंतजार करने से कोई खास अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।

उनके अनुसार, मौजूदा ब्याज दरों पर निवेश करना समझदारी भरा कदम हो सकता है क्योंकि भविष्य में दरों में कटौती की कोई गारंटी नहीं है। इसलिए अभी उपलब्ध स्थिर रिटर्न का फायदा उठाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

Deposit Laddering क्या है और क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञ निवेशकों को ‘Deposit Laddering’ रणनीति अपनाने की सलाह भी दे रहे हैं। इसमें पूरी राशि को एक ही FD में लगाने के बजाय अलग-अलग समय अवधि वाली कई FD में बांटा जाता है।

इस रणनीति का फायदा यह होता है कि निवेशक की अलग-अलग FD अलग-अलग समय पर मैच्योर होती रहती हैं। इससे जरूरत पड़ने पर पैसे की उपलब्धता बनी रहती है और दोबारा निवेश करने का लचीलापन भी मिलता है।

इसके अलावा, यह तरीका ब्याज दरों के सही समय का अनुमान लगाने के दबाव को भी कम करता है क्योंकि पूरा निवेश एक ही दर चक्र पर निर्भर नहीं रहता।

आगे भी निवेश के अवसर बने रहेंगे

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले समय में RBI की नीतियों या आर्थिक परिस्थितियों के कारण FD की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो निवेशक अपने पोर्टफोलियो को फिर से री-बैलेंस कर सकते हैं।

इसलिए केवल बेहतर ब्याज दरों की उम्मीद में निवेश को टालना मौजूदा अच्छे रिटर्न के अवसर को गंवाने जैसा हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह लेना उचित रहेगा।

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