दमोह में फसल बीमा आंकड़ों में बड़ा अंतर, किसानों को मुआवजा नहीं मिला

Saroj kanwar
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Damoh News: दमोह जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का बीमा करवाने की प्रक्रिया जारी है। इस बार भी 5 से 31 जुलाई तक किसानों को बीमा कराने का मौका दिया गया है। हालांकि, नीति आयोग के आंकड़ों और कृषि विभाग के रिकॉर्ड में फसल बीमा को लेकर बड़ा अंतर नजर आ रहा है।

नीति आयोग को भेजे गए आंकड़ों में जिले की 2 लाख 86 हजार हेक्टेयर भूमि को बीमा में शामिल दिखाया गया है, जबकि विभाग के दस्तावेजों में केवल 86 हजार हेक्टेयर फसल का ही बीमा किया गया बताया गया है।पिछले दो वर्षों में खराब फसल होने के बावजूद किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला।

2023 में 36 हजार किसानों को 4 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था, जबकि 2024 में मुआवजा घोषित होने के बाद भी अब तक वितरित नहीं किया गया है। कई किसानों ने सीएम हेल्पलाइन समेत अन्य जगह शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।दमोह में फसल बीमा का कार्य एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया को तीन साल के अनुबंध पर सौंपा गया है।

2024 में भी इसी कंपनी ने बीमा कार्य संभाला था, लेकिन कवरेज और क्लेम वितरण में कई समस्याएं आईं।इस बार राज्य सरकार की अधिसूचना में केवल सोयाबीन, मक्का, धान और अरहर फसलों को शामिल किया गया है, जबकि उड़द फसल का उल्लेख नहीं है। दमोह जिले में उड़द की करीब 80 हजार हेक्टेयर बोवाई हुई है, लेकिन उड़द की फसल खराब होने पर मुआवजे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

जिला स्तर पर उड़द को अधिसूचित माना गया है और बीमा कराने वाले किसानों को क्लेम मिलेगा, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।किसान लगातार मुआवजा न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फसल खराब होने पर प्रीमियम तो लिया गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।

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