Normal Cholesterol के बावजूद हो सकता है Heart Attack, इन टेस्ट से जानें छिपा खतरा

Saroj kanwar
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आज भी यह धारणा काफी आम है कि अगर किसी व्यक्ति की कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य है, तो उसे हार्ट अटैक का खतरा भी कम होगा। लेकिन हकीकत इतनी सीधी नहीं है। सामान्य लिपिड प्रोफाइल का मतलब यह नहीं है कि दिल पूरी तरह सुरक्षित है। कई लोगों में हार्ट अटैक से पहले भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य पाया जा सकता है।

दरअसल, हार्ट अटैक का जोखिम केवल LDL या टोटल कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर नहीं करता। धमनियों में सूजन, आनुवंशिक कारण, लिपोप्रोटीन (a), एपोलिपोप्रोटीन B (ApoB), हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा और कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम जमा होना जैसे कई दूसरे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए हार्ट हेल्थ का आकलन करते समय सिर्फ कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता।

क्या सामान्य कोलेस्ट्रॉल से हार्ट अटैक का खतरा खत्म हो जाता है?

नहीं। सामान्य लिपिड प्रोफाइल मुख्य रूप से खून में मौजूद कुछ प्रकार के कोलेस्ट्रॉल और फैट की स्थिति बताती है। जबकि हृदय रोग कई जोखिम कारकों के संयुक्त प्रभाव से विकसित हो सकता है।

धमनियों में सूजन, प्लाक बनने की प्रक्रिया, खून के थक्के बनने की प्रवृत्ति, हाई BP, डायबिटीज, आनुवंशिक जोखिम और स्मोकिंग जैसी स्थितियां सामान्य कोलेस्ट्रॉल के बावजूद हृदय की धमनियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसी कारण डॉक्टर किसी व्यक्ति के कार्डियोवैस्कुलर रिस्क का आकलन करते समय उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखते हैं।

Normal Cholesterol के बावजूद कौन से टेस्ट बता सकते हैं Heart Risk?

1. ApoB टेस्ट

कई बार LDL की रिपोर्ट सामान्य दिखाई देती है, लेकिन शरीर में ऐसे लिपोप्रोटीन कणों की संख्या ज्यादा हो सकती है जो धमनियों में प्लाक बनने के जोखिम से जुड़े हैं। ApoB यानी Apolipoprotein B टेस्ट इन कणों की संख्या का बेहतर अंदाजा देने में मदद कर सकता है।

कुछ लोगों में ApoB हृदय रोग के जोखिम को समझने के लिए केवल LDL से ज्यादा उपयोगी जानकारी दे सकता है।

2. hs-CRP से सूजन का पता

धमनियों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन भी हृदय रोग के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसके लिए हाई-सेंसिटिविटी C-reactive protein यानी hs-CRP टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

शरीर में सूजन का स्तर बढ़ा होने पर डॉक्टर इसे अन्य जोखिम कारकों के साथ मिलाकर हृदय रोग के खतरे का आकलन कर सकते हैं। हालांकि, hs-CRP अकेले यह तय नहीं करता कि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक जरूर होगा।

3. Coronary Artery Calcium (CAC) Score

कई लोगों की कोरोनरी धमनियों में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के कैल्शियम जमा होना शुरू हो सकता है। CAC स्कोरिंग एक CT-based जांच है, जो कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम की मौजूदगी का आकलन करती है।

खासकर कुछ ऐसे लोगों में, जिनका हृदय रोग का जोखिम मध्यम स्तर का हो, यह जांच आगे के जोखिम को समझने में डॉक्टर की मदद कर सकती है।

4. CT Coronary Angiography (CTCA)

CT Coronary Angiography एक आधुनिक इमेजिंग जांच है, जिसके जरिए कोरोनरी धमनियों की विस्तृत तस्वीर प्राप्त की जा सकती है। इससे धमनियों में प्लाक, कैल्शियम जमा होने और संकुचन जैसी स्थितियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

डॉक्टर व्यक्ति के लक्षणों और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर तय करते हैं कि CTCA की जरूरत है या नहीं। यह जांच हर व्यक्ति के लिए नियमित रूप से करवाना जरूरी नहीं है।

प्रदूषण, तनाव और जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

हार्ट डिजीज का खतरा सिर्फ खान-पान और कोलेस्ट्रॉल तक सीमित नहीं है। वायु प्रदूषण, खासकर PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के लंबे समय तक संपर्क को भी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

इसके अलावा लंबे समय का मानसिक तनाव और पारिवारिक यानी जेनेटिक जोखिम भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों के चलते कम उम्र में ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज विकसित होने की संभावना अधिक हो सकती है।

किन लोगों को हार्ट रिस्क की जांच पर डॉक्टर से बात करनी चाहिए?

हर व्यक्ति को ऊपर बताए गए सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिम कारकों को देखकर जांच की सलाह दे सकते हैं।

खास तौर पर इन स्थितियों में डॉक्टर से हार्ट रिस्क के बारे में चर्चा करना उपयोगी हो सकता है:

  • परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोग का इतिहास
  • डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • मोटापा
  • धूम्रपान
  • क्रोनिक किडनी डिजीज
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम
  • बार-बार सीने में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण

सिर्फ Cholesterol Report पर निर्भर न रहें

सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट निश्चित रूप से अच्छी बात है, लेकिन इससे हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। हृदय स्वास्थ्य को समझने के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, धूम्रपान, वजन, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास है या आपको डायबिटीज, हाई BP जैसे जोखिम मौजूद हैं, तो खुद से कोई टेस्ट कराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार तय कर सकते हैं कि ApoB, hs-CRP, CAC स्कोर, CTCA या किसी अन्य जांच की वास्तव में जरूरत है या नहीं।

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