माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं ये 5 गलतियां, जानें किन आदतों से रहें दूर

Saroj kanwar
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आज की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द होना आम बात है, लेकिन हर बार होने वाला सिरदर्द सामान्य नहीं होता। अगर सिर में बार-बार तेज दर्द हो, रोशनी या तेज आवाज से परेशानी महसूस हो, जी मिचलाए या कमजोरी लगे, तो यह माइग्रेन का संकेत हो सकता है। माइग्रेन केवल सिरदर्द तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक जटिल स्थिति है।

माइग्रेन के लक्षणों और दर्द को कई बार हमारी रोजमर्रा की आदतें भी प्रभावित करती हैं। अनियमित खान-पान, नींद पूरी न होना, तनाव, शरीर में पानी की कमी और कुछ जीवनशैली संबंधी आदतें माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। इसलिए माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

आइए जानते हैं ऐसी कौन-सी आदतें हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने पर माइग्रेन का दर्द या परेशानी बढ़ सकती है।

शरीर में पानी की कमी

माइग्रेन के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना परेशानी को बढ़ा सकता है। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, चक्कर और सिर में भारीपन जैसी दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं।

इसलिए दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। जरूरत के अनुसार नारियल पानी, सूप और पानी से भरपूर फल भी तरल पदार्थों की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।

नींद का बिगड़ा हुआ रूटीन

माइग्रेन और नींद के बीच गहरा संबंध माना जाता है। बहुत कम सोना, जरूरत से ज्यादा सोना या रोजाना अलग-अलग समय पर सोने-जागने की आदत कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है।

बेहतर है कि सोने और उठने का समय रोज लगभग एक जैसा रखा जाए। वयस्कों के लिए आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है।

चाय-कॉफी और शराब का ज्यादा सेवन

कुछ लोगों को कैफीन लेने से सिरदर्द में राहत मिलती है, लेकिन बहुत अधिक चाय या कॉफी का सेवन माइग्रेन को बढ़ा भी सकता है। इसी तरह शराब भी कुछ लोगों में माइग्रेन का ट्रिगर बन सकती है।

हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। अगर किसी खास पेय पदार्थ का सेवन करने के बाद बार-बार सिरदर्द शुरू होता है, तो उसे सीमित करना या उससे बचना फायदेमंद हो सकता है।

लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना

मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का लगातार इस्तेमाल आंखों पर तनाव डाल सकता है और कुछ लोगों में सिरदर्द की समस्या बढ़ा सकता है। माइग्रेन के दौरान तेज रोशनी और स्क्रीन की चमक विशेष रूप से परेशानी पैदा कर सकती है।

ऐसे समय स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें, बीच-बीच में आंखों को आराम दें और जरूरत महसूस होने पर कुछ देर शांत और कम रोशनी वाली जगह पर आराम करें।

लंबे समय तक भूखे रहना

माइग्रेन से बचाव में नियमित भोजन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। लंबे समय तक कुछ न खाना या भोजन के समय में बार-बार बदलाव करना कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।

इसलिए कोशिश करें कि भोजन समय पर करें और लंबे समय तक खाली पेट न रहें। साथ ही, अपने लिए ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान करें जो बार-बार माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ाते हैं।

माइग्रेन के ट्रिगर पहचानना है जरूरी

माइग्रेन का कारण और ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। किसी को नींद की कमी से परेशानी हो सकती है, तो किसी अन्य व्यक्ति में तनाव, भूखे रहने या किसी खास खाद्य पदार्थ से लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए सिरदर्द कब और किन परिस्थितियों में शुरू होता है, इसका रिकॉर्ड रखना उपयोगी हो सकता है।

अगर सिरदर्द बार-बार होता है, बहुत तेज रहता है या इसके साथ कमजोरी, देखने में परेशानी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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