फैटी लिवर का शरीर पर असर: लिवर के साथ इन अंगों पर भी पड़ सकता है प्रभाव, जानें बचाव के आसान तरीके

Saroj kanwar
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फैटी लिवर आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद हल्के हो सकते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते, जिसके कारण कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि, लंबे समय तक फैटी लिवर की अनदेखी करने पर यह समस्या लिवर के अलावा शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है।

लिवर शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन प्रक्रिया में मदद करने और शरीर के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर के कई हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है।

फैटी लिवर का असर किन अंगों पर हो सकता है?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, फैटी लिवर को केवल लिवर से जुड़ी समस्या मानना सही नहीं है। समय के साथ इसका संबंध हृदय, किडनी, पैंक्रियाज और शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम से भी हो सकता है।

फैटी लिवर वाले लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर में बढ़ने वाली सूजन का असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ सकता है।

कुछ स्थितियों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं, पैंक्रियाज की भूमिका ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण होती है, इसलिए मेटाबॉलिक गड़बड़ियों के कारण शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है।

अगर फैटी लिवर लंबे समय तक बढ़ता रहे और उचित देखभाल न की जाए, तो लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। गंभीर मामलों में सिरोसिस और लिवर फेलियर का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए फैटी लिवर का समय रहते पता लगाना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार कदम उठाना जरूरी है।

फैटी लिवर से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

फैटी लिवर के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की आदतों में सुधार महत्वपूर्ण है। खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • तले-भुने और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
  • सफेद मैदा और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से दूरी रखें।
  • डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
  • रोजाना नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने पर ध्यान दें।
  • पर्याप्त नींद लें और लगातार तनाव से बचने की कोशिश करें।

इसके अलावा, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी लिवर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

नियमित जांच क्यों है जरूरी?

फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। इसलिए जिन लोगों में इसका जोखिम अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच करवानी चाहिए। लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच स्थिति का आकलन करने में मदद कर सकती हैं।

अगर जांच में फैटी लिवर की पुष्टि होती है, तो इसे मामूली समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए। समय रहते खान-पान, शारीरिक गतिविधि और अन्य जीवनशैली की आदतों में बदलाव करने से स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

अगर लगातार थकान, पेट में भारीपन या भूख कम लगने जैसी परेशानी महसूस हो रही है, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सही समय पर जांच और उचित देखभाल लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण या जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार का निर्णय डॉक्टर की सलाह से ही लें।

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