14 हजार से 1 करोड़ की कमाई, फिर भी बोले- 20 हजार की सैलरी में था ज्यादा सुकून

Saroj kanwar
9 Min Read

नई दिल्ली: आमतौर पर अच्छी नौकरी, बड़ा पद और करोड़ों का पैकेज सफलता की निशानी माने जाते हैं। लेकिन क्या ज्यादा कमाई का मतलब हमेशा ज्यादा खुशी भी होता है? एक IT प्रोफेशनल की करीब 14 साल की करियर जर्नी इस सवाल का दिलचस्प जवाब देती है। आज उनकी सालाना कमाई 1.05 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, उनके पास लाखों रुपये के ESOPs हैं और उन्होंने अलग-अलग जगह निवेश भी किया है। इसके बावजूद वह अपने करियर के उस दौर को सबसे ज्यादा याद करते हैं, जब उनकी मासिक सैलरी महज 20 हजार रुपये थी।

टियर-3 कॉलेज से करियर की शुरुआत

इस IT प्रोफेशनल ने 2012 में टियर-3 कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें तुरंत नौकरी नहीं मिली। करीब छह महीने तक उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में आवेदन किया और नौकरी की तलाश जारी रखी।

आखिरकार उन्हें पहली नौकरी मिली, लेकिन शुरुआती वेतन सिर्फ 14,300 रुपये प्रति माह था। बड़े शहर में किराया, आने-जाने और रोजमर्रा के खर्चों के बीच इतनी कम आय में गुजारा करना आसान नहीं था। उस समय उन्हें हर खर्च को लेकर काफी सावधानी बरतनी पड़ती थी। फिर भी नौकरी मिलने का उत्साह अलग था, क्योंकि यही उनके प्रोफेशनल सफर की शुरुआत थी।

20 हजार की सैलरी क्यों बनी सबसे खास?

कुछ समय बाद उनकी सैलरी बढ़कर 20 हजार रुपये महीना हो गई। उनके मुताबिक, यही वह समय था जब उन्हें पहली बार वास्तविक आर्थिक आजादी का अनुभव हुआ।

उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम की और अपनी पसंद की बाइक खरीदी। उस समय वह बाइक उनके लिए सिर्फ एक वाहन नहीं थी, बल्कि अपनी मेहनत से हासिल की गई स्वतंत्रता का प्रतीक थी।

आज जब उनकी आय करोड़ों में है, तब भी उन्हें लगता है कि उस दौर की छोटी-छोटी उपलब्धियां ज्यादा खुशी देती थीं। वजह थी कि हर नई चीज उन्हें अपनी मेहनत का सीधा नतीजा लगती थी।

14 साल में 14,300 से 1.05 करोड़ रुपये तक पहुंची कमाई

करियर आगे बढ़ने के साथ उनकी कमाई भी लगातार बढ़ती गई। 20 हजार रुपये के बाद सैलरी 32 हजार और फिर 60 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु का रुख किया, जहां टेक इंडस्ट्री में उन्हें बेहतर अवसर मिले।

कुछ समय बाद उनकी सालाना आय करीब 13 लाख रुपये हो गई। इसके बाद अलग-अलग अवसरों और नौकरी बदलने के साथ उनका पैकेज 25 लाख, 40 लाख, 60 लाख और 80 लाख रुपये तक पहुंचा। आखिरकार उनकी मौजूदा सालाना आय करीब 1.05 करोड़ रुपये हो गई।

उनके पास 50 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य के ESOPs भी हैं। हालांकि, वह इन्हें तब तक पूरी तरह अपनी संपत्ति नहीं मानते, जब तक इन्हें वास्तव में बेचकर पैसा हासिल न किया जा सके।

करियर ग्रोथ सिर्फ प्रमोशन से नहीं होती

दिलचस्प बात यह है कि करीब 14 साल के करियर में उन्हें सिर्फ एक बार औपचारिक प्रमोशन मिला। उनका अनुभव बताता है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रमोशन का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

उनके मुताबिक, नई जिम्मेदारियां लेना, लगातार स्किल्स बेहतर करना और सही समय पर बेहतर अवसर तलाशना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। कई मामलों में नौकरी बदलने से भी प्रोफेशनल ग्रोथ और सैलरी दोनों में बड़ा बदलाव आता है।

ज्यादा कमाई के साथ बढ़ा तनाव

1 करोड़ रुपये से ज्यादा का पैकेज सुनने में शानदार लगता है, लेकिन उनका कहना है कि बड़ी सैलरी अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आती है।

जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, काम का दबाव बढ़ता है, टीम मैनेज करनी पड़ती है और ऑफिस से जुड़ी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यानी अधिक आय के साथ तनाव भी बढ़ सकता है।

उनका मानना है कि एक निश्चित आय के स्तर के बाद अतिरिक्त सैलरी का असर रोजमर्रा की जीवनशैली पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ता। करीब 25-30 लाख रुपये सालाना आय के बाद अतिरिक्त कमाई का बड़ा हिस्सा बचत और निवेश को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अब करोड़ों की सैलरी नहीं, समय की आजादी चाहिए

उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है कि अब उनका लक्ष्य सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। उनका कहना है कि एक समय के बाद उन्होंने महसूस किया कि लगातार किसी और के लिए काम करते रहना उन्हें संतुष्ट नहीं करता।

अब वह ऐसी जिंदगी चाहते हैं जिसमें उनके समय पर उनका खुद का नियंत्रण हो। उनका मानना है कि अगर खुद के बनाए किसी प्रोजेक्ट या बिजनेस से भविष्य में 1 लाख रुपये महीने की कमाई भी होने लगे और उसके साथ आजादी मिले, तो वह इसे करोड़ों रुपये की नौकरी से ज्यादा महत्व देंगे।

करोड़ों की कमाई के बावजूद साधारण लाइफस्टाइल

इतनी बड़ी आय के बावजूद उनका रहन-सहन काफी सामान्य है। वह आज भी करीब एक दशक पुरानी कार इस्तेमाल करते हैं और उन्होंने बेंगलुरु में फ्लैट खरीदने के बजाय एक विला कम्युनिटी में प्लॉट लिया है।

उनकी बचत और निवेश अलग-अलग जगहों पर फैले हुए हैं। इनमें जमीन, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो और कमर्शियल प्रॉपर्टी शामिल हैं। उनका फोकस महंगे लाइफस्टाइल के प्रदर्शन से ज्यादा लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा पर है।

क्रिप्टो में हुआ 20-25 लाख रुपये का नुकसान

उनकी निवेश यात्रा पूरी तरह सफल नहीं रही। क्रिप्टो ट्रेडिंग में उन्हें करीब 20-25 लाख रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा।

इस नुकसान से उन्होंने यह सबक लिया कि लगातार ट्रेडिंग करना काफी महंगा साबित हो सकता है। इसके मुकाबले लंबे समय के लिए निवेश करना उनके अनुभव में ज्यादा व्यावहारिक रणनीति है।

उनका एक विचार खास तौर पर चर्चा में आया—निवेश भले ही उबाऊ लगे, लेकिन ट्रेडिंग का नुकसान काफी महंगा हो सकता है।

नौकरी के साथ बना रहे हैं डिजिटल प्रोडक्ट

अपनी फुल-टाइम नौकरी के साथ वह छोटे डिजिटल प्रोडक्ट और माइक्रो-SaaS प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं। अभी उनके किसी प्रोजेक्ट के पास यूजर्स नहीं हैं, लेकिन वह प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केटिंग की प्रक्रिया को समझने पर काम कर रहे हैं।

उनका लक्ष्य ऐसा डिजिटल प्रोडक्ट तैयार करना है, जिससे हर महीने करीब 1,000 से 2,000 डॉलर की नियमित कमाई हो सके। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो वह नौकरी छोड़ने या कुछ समय का ब्रेक लेने पर विचार कर सकते हैं।

आखिर जिंदगी में चाहिए क्या?

उनकी पूरी कहानी का सार यही है कि पैसा जरूरी है, लेकिन पैसा ही जिंदगी का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। वह मानते हैं कि उन्हें पैसे से परेशानी नहीं है, लेकिन वह भविष्य में पीछे मुड़कर यह सोचने की स्थिति में नहीं रहना चाहते कि उन्होंने अपने सपनों को आजमाने की कोशिश ही नहीं की।

इस IT प्रोफेशनल की 14 साल की यात्रा दिखाती है कि करियर की सफलता को सिर्फ सैलरी के आंकड़े से नहीं मापा जा सकता। 14,300 रुपये की पहली नौकरी से लेकर 1.05 करोड़ रुपये के पैकेज तक पहुंचना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनके लिए सबसे खास वह दौर रहा जब 20 हजार रुपये की कमाई ने पहली बार उन्हें आत्मनिर्भर होने का एहसास कराया।

आखिरकार, बड़ी सैलरी आर्थिक सुरक्षा दे सकती है, लेकिन संतुष्टि अक्सर उस स्वतंत्रता से आती है जिसमें व्यक्ति अपने समय, फैसलों और भविष्य पर खुद का नियंत्रण महसूस करता है।

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