मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द? जानें बारिश और शरीर का कनेक्शन

Saroj kanwar
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मानसून की दस्तक गर्मी से राहत जरूर देती है, लेकिन जिन लोगों को पहले से जोड़ों में दर्द या गठिया की समस्या है, उनके लिए बारिश का मौसम परेशानी बढ़ा सकता है। इस दौरान घुटनों, कमर, कंधों और शरीर के दूसरे जोड़ों में दर्द, भारीपन और अकड़न की शिकायत कई लोगों में देखने को मिलती है। खास बात यह है कि कुछ लोगों को बारिश होने से पहले ही जोड़ों में दर्द या जकड़न महसूस होने लगती है।

क्या इसका मौसम से सच में कोई संबंध है या यह सिर्फ एक धारणा है? विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। आज नेशनल बोन एंड ज्वाइंट डे के मौके पर जानते हैं कि मानसून में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ सकता है और इस दौरान हड्डियों व जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मानसून में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ता है?

हम अक्सर लिवर, किडनी और पाचन तंत्र जैसे अंगों की सेहत पर ध्यान देते हैं, लेकिन जोड़ों में होने वाले दर्द और अकड़न को कई बार सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, अगर हर साल बारिश के मौसम में दर्द बढ़ता है, तो इसके पीछे कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं।

बैरोमेट्रिक प्रेशर में बदलाव

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान वातावरण में बैरोमेट्रिक प्रेशर यानी वायुमंडलीय दबाव में बदलाव होता है। इस बदलाव का असर शरीर के उन हिस्सों पर ज्यादा महसूस हो सकता है, जहां पहले से सूजन या किसी तरह की समस्या मौजूद हो।

डॉक्टर सिमोन थॉमस, वाइस चेयरमेन, रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड ऑर्थोपेडिक्स, मैक्स हॉस्पिटल, शालिमार बाग के मुताबिक, वायुमंडलीय दबाव कम होने पर जोड़ों के आसपास मौजूद टिश्यू प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से गठिया या सूजन की समस्या है, उनमें दर्द से जुड़ी नसें अधिक संवेदनशील हो सकती हैं। इसके कारण दर्द और जकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है।

यही वजह है कि कुछ लोगों को बारिश शुरू होने से पहले ही जोड़ों में भारीपन या दर्द का एहसास होने लगता है।

हवा में बढ़ जाती है नमी

मानसून के दौरान वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। अधिक नमी के कारण कुछ लोगों को मांसपेशियों और लिगामेंट्स में खिंचाव या कठोरता महसूस हो सकती है। इससे जोड़ों की सामान्य लचक प्रभावित हो सकती है और चलने-फिरने में परेशानी बढ़ सकती है।

खासकर सुबह उठने के बाद घुटनों, कमर या दूसरे जोड़ों में अकड़न महसूस होना उन लोगों में ज्यादा परेशान कर सकता है, जिन्हें पहले से जोड़ों की समस्या है।

कम हो जाती है शारीरिक गतिविधि

बारिश के दिनों में बाहर निकलना कम हो जाता है। कई लोग वॉक, एक्सरसाइज या दूसरी शारीरिक गतिविधियां भी रोक देते हैं। लंबे समय तक बैठे या घर के अंदर रहने से जोड़ों की गतिशीलता कम हो सकती है और उन्हें सपोर्ट देने वाली मांसपेशियां भी कमजोर पड़ सकती हैं।

नतीजतन, जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या अधिक महसूस हो सकती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान धूप कम मिलने से कुछ लोगों में विटामिन D का स्तर प्रभावित हो सकता है, जो हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

किन लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है?

मानसून खुद कोई नई बीमारी पैदा नहीं करता, लेकिन पहले से मौजूद हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं के लक्षण इस मौसम में अधिक महसूस हो सकते हैं।

इन लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए:

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे लोग
  • रूमेटॉयड आर्थराइटिस वाले मरीज
  • पुराने फ्रैक्चर की समस्या वाले लोग
  • पहले चोट लगने के कारण जोड़ों में परेशानी झेल चुके लोग
  • घुटने का प्रत्यारोपण यानी टोटल नी रिप्लेसमेंट करा चुके मरीज

मानसून में जोड़ों को कैसे रखें स्वस्थ?

बारिश के मौसम में जोड़ों की परेशानी से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

हल्की एक्सरसाइज करें: रोज करीब 30-40 मिनट हल्की वॉक या घर पर आसान एक्सरसाइज करने की कोशिश करें।

लंबे समय तक न बैठें: लगातार एक ही जगह बैठे रहने से बचें। बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें-फिरें।

जोड़ों को ठंड और नमी से बचाएं: बहुत ठंडी या नम परिस्थितियों में लंबे समय तक रहने से बचें और शरीर को आरामदायक तापमान में रखें।

पौष्टिक आहार लें: डाइट में कैल्शियम और विटामिन D समेत जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करें।

फिजियोथेरेपी जारी रखें: अगर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट ने एक्सरसाइज या फिजियोथेरेपी की सलाह दी है, तो उसे नियमित रूप से जारी रखें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

हर बार मौसम बदलने पर होने वाला हल्का दर्द गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर जोड़ों के दर्द के साथ सूजन, बुखार, लगातार बढ़ता दर्द या चलने-फिरने में ज्यादा परेशानी हो रही है, तो इसे केवल मानसून का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। समय पर जांच और उपचार से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है और जोड़ों को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, मानसून में जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित हल्की गतिविधि, संतुलित खानपान और पहले से मौजूद समस्या का सही इलाज बेहद जरूरी है। अगर दर्द बार-बार हो रहा है या उसकी तीव्रता बढ़ रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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