मौत के करीब पहुंचने पर शरीर में दिख सकते हैं ये 12 बदलाव, जानिए डॉक्टर किन संकेतों को मानते हैं गंभीर

Saroj kanwar
8 Min Read

मृत्यु जीवन का एक अटल सत्य है, लेकिन इस विषय पर बात करना आज भी कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। खासतौर पर जब परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही हो, तब परिजनों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आगे क्या हो सकता है।

पैलिएटिव और हॉस्पिस केयर से जुड़े डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ऐसे कई शारीरिक व मानसिक बदलावों को पहचानते हैं, जो किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के जीवन के अंतिम चरण की ओर बढ़ने का संकेत हो सकते हैं। इन संकेतों को समझने का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि मरीज को अधिक आराम और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना है।

ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में ये सभी संकेत दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कुछ लक्षण दूसरी गंभीर बीमारियों या दवाओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण है।

मृत्यु से पहले दिखाई देने वाले 12 सामान्य संकेत

1. अत्यधिक कमजोरी और लगातार नींद आना

अंतिम चरण में मरीज की ऊर्जा काफी कम हो सकती है। वह पहले की तुलना में अधिक समय सोने में बिताने लगता है और थोड़ी बातचीत या हलचल के बाद भी थक सकता है। यह सामान्य थकान से अलग हो सकता है और बीमारी के बढ़ने के साथ शरीर में ऊर्जा कम होने से जुड़ा होता है।

2. खाने-पीने की इच्छा कम होना

जीवन के अंतिम चरण में शरीर की भोजन और तरल पदार्थों की जरूरत कम हो सकती है। मरीज की भूख कम हो सकती है और वह खाने या पानी पीने में रुचि न दिखाए। ऐसी स्थिति में मरीज को जबरदस्ती खाना-पानी देने के बजाय डॉक्टर या पालीएटिव केयर टीम की सलाह लेना बेहतर होता है।

3. सांस लेने के तरीके में बदलाव

गंभीर बीमारी के अंतिम चरण में सांस लेने की गति और उसका पैटर्न बदल सकता है। कभी सांस तेज हो सकती है तो कभी धीमी। कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी या घुटन जैसा महसूस हो सकता है। डॉक्टर की सलाह से दवाइयां, उचित स्थिति में लिटाना और शांत वातावरण मरीज को राहत देने में मदद कर सकते हैं।

4. दर्द में बदलाव

अंतिम समय में दर्द का अनुभव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। कुछ मरीजों में दर्द बढ़ सकता है, जबकि कुछ में इसका स्वरूप बदल सकता है। कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के साथ दर्द की समस्या हो सकती है। डॉक्टर उचित दवाओं और पेन मैनेजमेंट के जरिए मरीज को आराम देने की कोशिश करते हैं।

5. बेचैनी, घबराहट या चिंता

मरीज में बेचैनी बढ़ सकती है। वह बार-बार करवट बदल सकता है, सोने में परेशानी हो सकती है या घबराहट महसूस कर सकता है। इसके पीछे बीमारी, दवाइयां, दर्द या मानसिक तनाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। शांत माहौल, परिवार का साथ और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं राहत देने में मदद कर सकती हैं।

6. मतली या उल्टी की समस्या

अंतिम चरण में पाचन तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे मतली या उल्टी की शिकायत हो सकती है। कुछ दवाएं, कब्ज या बीमारी की गंभीरता भी इसका कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर उपचार की सलाह देते हैं।

7. कब्ज होना

कम खाना-पीना, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ दर्द निवारक दवाओं के कारण कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। इससे मरीज को काफी असहजता हो सकती है। डॉक्टर की सलाह से उपयुक्त दवाओं और अन्य उपायों के जरिए इस परेशानी को कम किया जा सकता है।

8. बातचीत और लोगों से दूरी बढ़ना

अंतिम चरण में मरीज पहले की तुलना में कम बातचीत कर सकता है और लोगों से मिलने-जुलने में रुचि कम हो सकती है। वह ज्यादा समय शांत रहना या सोना पसंद कर सकता है। ऐसे समय में उसे अकेला महसूस न होने दें। उसके पास बैठना, धीरे-धीरे बात करना और भावनात्मक सहारा देना काफी मददगार हो सकता है।

9. पेशाब या मल पर नियंत्रण कम होना

बीमारी बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इसकी वजह से मरीज को पेशाब या मल त्याग पर नियंत्रण रखने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज की साफ-सफाई और आराम का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

10. हाथ-पैर ठंडे होना और त्वचा का रंग बदलना

जीवन के अंतिम चरण में शरीर के कुछ हिस्सों तक रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। इसके कारण हाथ-पैर ठंडे महसूस हो सकते हैं। त्वचा पर नीले, बैंगनी या धब्बेदार निशान भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ऐसे बदलाव अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।

11. भ्रम या डिलीरियम की स्थिति

कुछ मरीजों में अंतिम चरण के दौरान भ्रम, असामान्य व्यवहार या बातचीत में बदलाव देखा जा सकता है। उन्हें समय, स्थान या आसपास मौजूद लोगों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। कभी-कभी वे ऐसी चीजों को देखने या सुनने की बात भी कर सकते हैं, जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। इसके पीछे दवाइयां, शरीर में रासायनिक बदलाव, अंगों की कार्यक्षमता में कमी या अन्य चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं।

12. सांस के साथ घरघराहट जैसी आवाज

जीवन के अंतिम समय में कुछ मरीजों की सांस के साथ घरघराहट या घड़घड़ाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। इसे आमतौर पर Death Rattle कहा जाता है। यह अक्सर गले या वायुमार्ग में जमा स्राव के कारण होता है। आवाज परिजनों को परेशान कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि मरीज को उसी अनुपात में तकलीफ हो। मरीज की स्थिति के अनुसार करवट बदलना या सिर को थोड़ा ऊंचा रखना मदद कर सकता है। ऐसे समय में डॉक्टर या नर्स की सलाह लेना सबसे उचित है।

ऐसे समय में परिवार क्या कर सकता है?

अगर कोई गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति जीवन के अंतिम चरण में है, तो परिवार का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य उसे आराम और भावनात्मक सहारा देना होना चाहिए। मरीज की तकलीफ को समझने की कोशिश करें, उसकी जरूरत के अनुसार आसपास रहें और किसी भी नए या गंभीर लक्षण की जानकारी डॉक्टर या पालीएटिव केयर टीम को दें।

यह भी जरूरी है कि ऊपर बताए गए संकेतों को देखकर खुद से यह निष्कर्ष न निकालें कि मृत्यु तुरंत होने वाली है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और इन लक्षणों की वजह कई अन्य चिकित्सकीय समस्याएं भी हो सकती हैं।

Disclaimer

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और विशेषज्ञों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है। इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। यदि किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति में अचानक या चिंताजनक बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत उसके इलाज कर रहे डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करें।

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