वायरल फीवर का बढ़ा कहर! अस्पतालों में बढ़े बुखार और गले के संक्रमण के मरीज, डॉक्टर से जानें बचाव के आसान उपाय

Saroj kanwar
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दिल्ली-NCR में इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कभी बारिश हो रही है तो कुछ ही समय बाद तेज धूप निकल आती है। मौसम में इस तरह के उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है। बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी समस्याओं के साथ-साथ मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बरसात के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हर साल मानसून के दौरान इन संक्रमणों के मामले बढ़ते हैं, इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।

बारिश के मौसम में बढ़ रहे वायरल संक्रमण के मामले

बारिश शुरू होते ही अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और गले के संक्रमण से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है।

डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों में बुखार लंबे समय तक बना रहने की शिकायत भी सामने आ रही है। हालांकि, समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और उचित सावधानी बरतने वाले मरीजों में जल्द सुधार देखा जा रहा है।

डॉक्टर ने बताया किन लक्षणों वाले मरीज ज्यादा आ रहे

इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनुज चौहान के मुताबिक, रोजाना ओपीडी में आने वाले करीब 150 से 200 मरीजों में तेज बुखार, सर्दी-जुकाम, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं। इनमें बड़ी संख्या वायरल बुखार और गले के संक्रमण से जुड़े मरीजों की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान दूषित पानी, अस्वच्छ भोजन और आसपास की गंदगी संक्रमण फैलने की वजह बन सकती है। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, पानी जमा होने के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ती है। इससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

मानसून में संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?

बारिश के मौसम में कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है:

  • बारिश में भीगने के बाद जल्द से जल्द गीले कपड़े बदलकर सूखे कपड़े पहनें।
  • पीने के लिए साफ, फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबला पानी इस्तेमाल करें।
  • ताजा और पौष्टिक भोजन करें तथा लंबे समय से रखा या बासी खाना खाने से बचें।
  • खाना खाने और बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें।
  • घर, छत, कूलर और आसपास ऐसी जगहों पर पानी जमा न होने दें जहां मच्छर पनप सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें।
  • पर्याप्त नींद और आराम लें तथा शरीर में पानी की कमी न होने दें।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर लगातार तेज बुखार, सर्दी-जुकाम, नाक बहना, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं तो इन्हें सामान्य समझकर टालना ठीक नहीं है। ऐसे लक्षण लंबे समय तक रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना और आवश्यक जांच कराना बेहतर होता है।

वहीं, तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, ज्यादा बदन दर्द, पेट से जुड़ी परेशानी या मल के साथ खून आने जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। ऐसे लक्षण कुछ गंभीर संक्रमणों, जिसमें डेंगू भी शामिल हो सकता है, की ओर संकेत कर सकते हैं।

साफ-सफाई और सावधानी है सबसे जरूरी

मानसून के दौरान बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ घर और आसपास की सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर पानी जमा होने से रोकना चाहिए, क्योंकि यही मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बन सकता है।

अगर बुखार या संक्रमण के लक्षण लगातार बने रहते हैं या स्थिति बिगड़ती महसूस हो रही है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी को किसी चिकित्सकीय निदान या उपचार का विकल्प न मानें। किसी भी बीमारी के लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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