खून में इन्फेक्शन क्यों होता है? जानिए सबसे बड़ा कारण और कितना है जानलेवा खतरा

Saroj kanwar
5 Min Read

हमारे शरीर में बहने वाला खून केवल लाल रंग का तरल पदार्थ नहीं है, बल्कि यह एक जटिल जैविक प्रणाली है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे महत्वपूर्ण घटक मौजूद होते हैं। यही रक्त शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाकर उन्हें सही तरीके से काम करने में मदद करता है। ऐसे में यदि खून में संक्रमण फैल जाए तो शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. आर.एस. मिश्रा के अनुसार, शरीर में किसी भी प्रकार के संक्रमण का समय पर इलाज न होने पर वह रक्त तक पहुंच सकता है। जब संक्रमण पूरे शरीर में फैलकर गंभीर स्थिति पैदा कर देता है, तो उसे सेप्सिस (Sepsis) कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और इलाज में देरी होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।

क्या है सेप्सिस?

सेप्सिस को ब्लड इन्फेक्शन की सबसे गंभीर अवस्था माना जाता है। अधिकतर मामलों में यह बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण से शुरू होता है। जब शरीर के किसी हिस्से में मौजूद बैक्टीरियल इन्फेक्शन का समय पर इलाज नहीं हो पाता, तो संक्रमण धीरे-धीरे रक्त में पहुंचकर पूरे शरीर में फैल जाता है।

हालांकि, केवल बैक्टीरिया ही नहीं बल्कि वायरस, फंगस और कुछ परजीवी (पैरासाइट) भी सेप्सिस का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी संक्रमण को हल्के में लेना सही नहीं है।

किन अंगों के संक्रमण से बढ़ता है खतरा?

अगर शरीर के किसी भी हिस्से में संक्रमण लंबे समय तक बना रहे और उसका उपचार न किया जाए, तो वह ब्लड इन्फेक्शन का रूप ले सकता है। फिर भी कुछ अंग ऐसे हैं, जहां होने वाले संक्रमण से सेप्सिस का खतरा अधिक देखा जाता है।

इनमें शामिल हैं—

  • फेफड़ों का संक्रमण (निमोनिया)
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
  • त्वचा या गहरे घाव का संक्रमण

कई बार मामूली दिखने वाला संक्रमण भी तेजी से बढ़कर रक्त तक पहुंच जाता है और पूरे शरीर को प्रभावित करने लगता है।

किन लोगों को रहता है सबसे ज्यादा खतरा?

हालांकि किसी भी व्यक्ति को ब्लड इन्फेक्शन हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। इनमें शामिल हैं—

  • बुजुर्ग
  • छोटे बच्चे
  • डायबिटीज के मरीज
  • कैंसर से पीड़ित लोग
  • किडनी या लिवर की बीमारी वाले मरीज
  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
  • इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले मरीज

इन लोगों को संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सेप्सिस के शुरुआती लक्षण

ब्लड इन्फेक्शन की पहचान समय रहते हो जाए तो इलाज आसान हो सकता है। इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं—

  • बार-बार या तेज बुखार
  • शरीर का तापमान सामान्य से कम होना (हाइपोथर्मिया)
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • तेजी से सांस चलना
  • अत्यधिक कमजोरी महसूस होना
  • भ्रम या उलझन की स्थिति
  • बेहोशी जैसा महसूस होना
  • पेशाब की मात्रा कम होना
  • ब्लड प्रेशर का गिरना

यदि किसी संक्रमण के साथ ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

खुद से एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी

कई लोग हल्का संक्रमण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत नुकसानदायक हो सकती है। सेप्सिस कोई सामान्य संक्रमण नहीं, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।

इसलिए यदि संक्रमण बढ़ता हुआ महसूस हो या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। डॉक्टर मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण की गंभीरता के आधार पर सही इलाज और एंटीबायोटिक तय करते हैं।

निष्कर्ष

ब्लड इन्फेक्शन और सेप्सिस ऐसी गंभीर स्थितियां हैं जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी संक्रमण का समय पर इलाज, सही जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि तेज बुखार, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या ब्लड प्रेशर कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए चिकित्सकीय सहायता लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के संक्रमण या स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *