हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो जाती है। लंबे समय तक रक्त प्रवाह रुकने पर दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
दिल्ली के BLK-Max Super Specialty Hospital के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी (Cardiology & Structural Heart Disease) विभाग के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के अनुसार, हार्ट अटैक अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। आजकल युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि किस उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
किस उम्र में बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा रहता है, लेकिन अब 30 साल की उम्र के आसपास और कई बार 20 की उम्र के आखिरी वर्षों में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं।
कम उम्र में हार्ट अटैक के पीछे खराब लाइफस्टाइल, लगातार तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। कई बार हार्ट अटैक बिना किसी बड़े संकेत के भी हो सकता है, इसलिए शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हार्ट अटैक कब हो सकता है?
कुछ साल पहले तक हार्ट अटैक को आमतौर पर 60 वर्ष के बाद होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब 35 साल के बाद इसका खतरा धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। ज्यादातर लोगों में पहला हार्ट अटैक 30 के आखिरी वर्षों से लेकर 50 साल की उम्र के बीच देखा जाता है।
पुरुषों में हृदय रोग का खतरा अपेक्षाकृत कम उम्र में शुरू हो सकता है, जबकि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में 20 साल की उम्र के लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं।
इन लोगों में खतरा अधिक हो सकता है:
- जिनके परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा हो
- धूम्रपान करने वाले लोग
- मोटापे से परेशान व्यक्ति
- हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग
- लंबे समय से डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोग
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार इसके संकेत बहुत हल्के होते हैं, जिन्हें लोग सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
हार्ट अटैक के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस होना
- सीने में होने वाली परेशानी का कुछ मिनटों तक बने रहना या बार-बार लौटना
- दर्द का बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े, पीठ या दोनों हाथों तक फैलना
- सांस लेने में परेशानी या अचानक सांस फूलना
- ज्यादा पसीना आना
- चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना
- मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
- बिना किसी वजह के ज्यादा थकान होना
खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में हार्ट अटैक के दौरान हमेशा तेज सीने का दर्द नहीं होता। ऐसे लोगों को अचानक थकान, हल्की बेचैनी, थोड़ी मेहनत में सांस फूलना, पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता या सीने में अजीब भारीपन महसूस हो सकता है।
अगर ये लक्षण अचानक दिखाई दें या शारीरिक गतिविधि के दौरान बढ़ने लगें, तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत मेडिकल सहायता लें।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए स्वस्थ आदतों को अपनाना बेहद जरूरी है। कुछ आसान उपायों से दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
- 30 साल की उम्र के बाद समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें।
- ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्की एक्सरसाइज करें।
- अपनी डाइट में फल और हरी सब्जियों को शामिल करें।
- ज्यादा नमक, तला-भुना खाना और जंक फूड कम करें।
- धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
- लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और वजन को संतुलित रखें।
सीने में परेशानी को न करें नजरअंदाज
अगर कभी भी सीने में दर्द, भारीपन, सांस लेने में परेशानी या हार्ट अटैक से जुड़े अन्य लक्षण महसूस हों, तो घरेलू उपायों के भरोसे न रहें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
Highlights:
- हार्ट अटैक अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है।
- 20 और 30 की उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
- सीने में दर्द, भारीपन और सांस फूलना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या या लक्षण के लिए हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें।