Birth and Death Certificate Rules: केंद्र सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराने वाले लोगों के लिए भविष्य में प्रमाणपत्र बनवाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। खासकर दो साल से अधिक की देरी होने पर सीधे कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ सकती है।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में क्या बदलने वाला है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार Registration of Births and Deaths Act में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत यदि किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु के दो साल बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो केवल प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का आदेश अनिवार्य होगा।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संशोधन का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।
वर्तमान नियम क्या हैं?
फिलहाल यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष या उससे अधिक की देरी से कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यपालक मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होती है। अनुमति मिलने के बाद प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
नए प्रस्ताव के बाद क्या होंगे नियम?
यदि सरकार का नया प्रस्ताव लागू होता है, तो पंजीकरण से जुड़े नियम इस प्रकार हो सकते हैं—
- जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य रहेगा।
- 30 दिन से 1 वर्ष तक की देरी होने पर जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीकरण कराया जा सकेगा।
- 1 से 2 वर्ष की देरी होने पर DM, SDM या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।
- 2 वर्ष से अधिक की देरी होने पर केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जन्म या मृत्यु का पंजीकरण संभव होगा।
सरकार यह बदलाव क्यों कर रही है?
सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु का समय पर और डिजिटल पंजीकरण कई महत्वपूर्ण कारणों से जरूरी है। इससे सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी, जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े अधिक सटीक होंगे तथा फर्जी या गलत तरीके से देर से होने वाले पंजीकरण पर रोक लगेगी।
इसके अलावा, डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) को और अधिक मजबूत बनाने में भी यह कदम अहम माना जा रहा है।
लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि यह संशोधन लागू हो जाता है, तो जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। दो साल से अधिक की देरी होने पर लोगों को कोर्ट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जिससे प्रमाणपत्र प्राप्त करने में अधिक समय और औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी।
नोट: फिलहाल यह केवल प्रस्तावित संशोधन है। अंतिम नियम तब लागू होंगे, जब केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे देंगे।