नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई हैं। गोल्ड फिलहाल करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस (लगभग ₹3.75 लाख से ₹3.89 लाख) के आसपास कारोबार कर रहा है, लेकिन बाजार में इसके ऊपर लगातार दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बनी सख्त नीति की उम्मीदें फिलहाल सोने की तेजी को सीमित कर रही हैं।
क्यों कमजोर पड़ रहा है सोना?
हाल के दिनों में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। जब डॉलर की कीमत बढ़ती है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में दबाव बढ़ जाता है।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने के संकेत भी निवेशकों की सोच बदल रहे हैं। चूंकि सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में निवेशक बेहतर रिटर्न देने वाले अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंची कीमत
बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोना हाल ही में 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जो पिछले कई महीनों में पहली बार देखने को मिला है। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल सुरक्षित निवेश के बजाय अधिक रिटर्न देने वाले एसेट्स की ओर बढ़ रहा है।
अगर इस साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो जनवरी 2026 में रिकॉर्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस (करीब ₹5.33 लाख) तक पहुंचने वाला सोना अब जून के अंत तक लगभग 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। यानी कुछ ही महीनों में इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
आगे कैसा रहेगा गोल्ड का ट्रेंड?
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने पर दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने वर्ष 2026 के लिए अपने गोल्ड प्राइस अनुमान में कटौती की है। अनुमान है कि तीसरी तिमाही में सोने की औसत कीमत करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस और चौथी तिमाही में लगभग 4,600 डॉलर प्रति औंस रह सकती है।
हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानी जा रही है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी और वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भविष्य में सोने को सहारा दे सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट की गुंजाइश सीमित रह सकती है और लंबी अवधि में सोना फिर से मजबूती दिखा सकता है.