रुपये ने दिखाया दम, गिरावट थमी तो अचानक आई मजबूती—RBI की चाल का असर?

Saroj kanwar
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति खास तौर पर दबाव बढ़ाने वाली साबित हो रही है, क्योंकि इससे डॉलर की मांग तेजी से बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव बनता है।

इसी दबाव को कम करने और रुपये को स्थिरता देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल के दिनों में बड़ा और आक्रामक हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में लगभग 2 से 3 अरब डॉलर की बिक्री की, जबकि कुछ बाजार अनुमानों में यह आंकड़ा इससे भी अधिक यानी 4 से 5 अरब डॉलर तक बताया जा रहा है।

रुपये में अचानक सुधार, 96 के स्तर के पार रिकवरी

RBI के हस्तक्षेप के बाद रुपये में तेज रिकवरी देखने को मिली। बैंकिंग सेक्टर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रुपये ने डॉलर के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन करते हुए 96 के स्तर को पार किया।

  • गुरुवार को रुपया लगभग 0.64% मजबूत होकर 96.20 के स्तर पर बंद हुआ
  • अगले कारोबारी सत्र में भी मजबूती जारी रही
  • शुक्रवार को रुपया और बेहतर होकर 95.93 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया

यह तेजी मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक की डॉलर बिक्री और बाजार में बढ़ी लिक्विडिटी सपोर्ट के कारण देखी गई।

RBI की रणनीति: सिर्फ रोकना नहीं, बल्कि बाजार को स्थिर करना

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI का उद्देश्य किसी निश्चित स्तर पर रुपये को “फिक्स” करना नहीं था, बल्कि करेंसी में अचानक गिरावट को रोककर बाजार में स्थिरता लाना था। इससे सट्टेबाजी करने वाले ट्रेडर्स को भी झटका लगा है और बाजार में अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है।

जानकारों के अनुसार, RBI आमतौर पर रोजाना लगभग 1 अरब डॉलर तक की बिक्री करता रहा है, लेकिन इस बार हस्तक्षेप का स्तर काफी अधिक रहा और इसे दोगुना या उससे भी ज्यादा बढ़ा दिया गया।

रुपये पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?

रुपये में कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं:

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
  • भारत की बड़ी ऊर्जा निर्भरता (क्रूड ऑयल का भारी आयात)
  • डॉलर की बढ़ती मांग, खासकर तेल आयात भुगतान के लिए
  • पिछले कुछ हफ्तों में रुपये में लगभग 2.5% की गिरावट

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही आयात बिल बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है।

सरकार और RBI की निगरानी जारी

सरकार भी रुपये की स्थिरता को लेकर गंभीर नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, मुद्रा बाजार को मजबूत करने के लिए कई सख्त कदमों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, कुछ विशेषज्ञ यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि आगे चलकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है, लेकिन RBI के सक्रिय हस्तक्षेप से बाजार में अस्थायी राहत और स्थिरता देखने को मिली है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और केंद्रीय बैंक की नीतियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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