दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार तीन दिनों से जारी तेजी पर शुक्रवार को विराम लग गया। कमजोर मांग और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव में कुछ नरमी आने के संकेतों के चलते गोल्ड रेट में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी अनिश्चितता की वजह से निवेशक अब भी सतर्क नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और भाव स्थिर बने रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
दिल्ली में सोने की कीमतों में गिरावट
शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 600 रुपये टूटकर 1,64,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (टैक्स सहित) पर पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आंशिक प्रगति की खबरों से निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड से थोड़ा कम हुआ, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दिया।
हालांकि, मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी चिंताओं के कारण बाजार में पूरी तरह राहत का माहौल नहीं है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल संभलकर कदम रख रहे हैं।
चांदी के दाम स्थिर
सोने में गिरावट के बावजूद चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। दिल्ली के बुलियन मार्केट में चांदी का भाव 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर बना रहा।
लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय तनाव, भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर बुलियन बाजार पर पड़ रहा है। इसी कारण निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है।
इंटरनेशनल मार्केट में भी नरमी
वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड हल्की गिरावट के साथ 4,522.32 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। वहीं, चांदी करीब 1 फीसदी फिसलकर 75.87 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
मीराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण जैसे मुद्दे अब भी विवाद का कारण बने हुए हैं। यही वजह है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर
इस बीच अमेरिका ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री व्यापार पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी बातचीत में सीमित प्रगति की बात स्वीकार की है, लेकिन साथ ही होर्मुज को लेकर मतभेदों को बड़ी चुनौती बताया।
इन्हीं संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाए हुए हैं। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ता है तो सोने की कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है, जबकि तनाव कम होने पर कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।