चीन से बढ़ी तकरार के बीच भारत की ओर बढ़ा अमेरिका, रिश्ते सुधारने आएंगे रूबियो?

Saroj kanwar
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नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का 23 से 26 मई तक भारत दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। यह उनका विदेश मंत्री बनने के बाद पहला भारत दौरा है और ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से तनाव देखने को मिला है। माना जा रहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश साबित हो सकती है।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन दौरे से लौटे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने उनका भव्य स्वागत जरूर किया, लेकिन अमेरिका को कोई बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि हासिल नहीं हुई। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping लगातार चीन को वैश्विक महाशक्ति के रूप में पेश करते रहे। हालांकि, दुनिया की बदलती राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत को अमेरिका और चीन दोनों नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊर्जा देने की कोशिश

मार्को रुबियो की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के संबंधों में कई मुद्दों को लेकर असहजता बढ़ी है। ट्रंप द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद रिश्तों में ठंडापन आया था। अब वॉशिंगटन और नई दिल्ली दोनों ही संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।

यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार एआई मेसन ने भारत को “140 करोड़ लोगों वाला नया भारत” बताते हुए कहा कि आज भारत वैश्विक राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की रणनीतिक टीम की भी जमकर तारीफ की।

जयशंकर और डोभाल की रणनीति की अमेरिका में चर्चा

अमेरिकी विश्लेषकों ने भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar को आधुनिक कूटनीति का मजबूत चेहरा बताया है। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval को शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली रणनीतिकार माना जा रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी की भूमिका को भी दोनों देशों के बीच अहम संवाद स्थापित करने वाला बताया गया है।

भारत को ज्यादा तेल और गैस बेचने को तैयार अमेरिका

अपने बयान में मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण साझेदार” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। रुबियो के मुताबिक, अमेरिका अपना उत्पादन लगातार बढ़ा रहा है और वह भारत को ज्यादा मात्रा में तेल और गैस निर्यात करने के लिए तैयार है।

इस दौरे के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार समझौते और टेक्नोलॉजी साझेदारी जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी पक्ष भारत में अरबों डॉलर के नए निवेश की उम्मीद भी जता रहा है।

QUAD को मजबूत बनाने पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली में होने वाली QUAD देशों की बैठक भी इस दौरे का बड़ा केंद्र होगी। QUAD में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। 26 मई को होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और चीन की बढ़ती गतिविधियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

QUAD का मुख्य उद्देश्य Indo-Pacific क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना है। माना जा रहा है कि इस मंच के जरिए अमेरिका भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।

पर्दे के पीछे चल रही बड़ी कूटनीतिक तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रुबियो की यात्रा सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीतिक तैयारी चल रही है। अप्रैल 2025 में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की भारत यात्रा के बाद यह ट्रंप प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण हाई-लेवल मीटिंग मानी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक मतभेदों और टैरिफ विवादों को पीछे छोड़कर रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

भारत की रणनीतिक अहमियत लगातार बढ़ी

राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ अपने संपर्क बनाए रखे, जिससे भारत के रणनीतिक हलकों में कुछ चिंता जरूर बढ़ी। हालांकि, इसके बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई।

दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद, खुफिया जानकारी साझा करने, जेट इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में सहयोग लगातार जारी रहा। इससे साफ है कि अमेरिका के लिए भारत आज भी Indo-Pacific रणनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है।

जून में मोदी-ट्रंप मुलाकात पर टिकी नजरें

सूत्रों के मुताबिक, जून में फ्रांस में होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हो सकती है। फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी।

ऐसे में मार्को रुबियो का भारत दौरा आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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