गर्मी में आंखों के आगे अंधेरा छाना साधारण थकान नहीं, हो सकता है हीटस्ट्रोक का संकेत: डॉक्टरों की चेतावनी

Saroj kanwar
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देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच चुका है। आसमान से बरसती तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस भीषण गर्मी के बीच हीटस्ट्रोक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अक्सर लोग गर्मी में होने वाली चक्कर, कमजोरी या बेहोशी को सामान्य थकावट समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। ये लक्षण हीटस्ट्रोक की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं।


शरीर पर कैसे असर डालता है हीटस्ट्रोक?

जब शरीर लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहता है, तो उसका तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। सामान्य स्थिति में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है, लेकिन तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

इसके परिणामस्वरूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जिसका सीधा असर दिमाग, दिल और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।


शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों के अनुसार हीटस्ट्रोक की शुरुआत अक्सर साधारण थकान जैसी लगती है, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति गंभीर हो सकती है। इन संकेतों पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है:

  • बार-बार चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना
  • अचानक अत्यधिक कमजोरी आना
  • आंखों के सामने धुंधलापन या अंधेरा छा जाना
  • तेज सिरदर्द और बेचैनी
  • अचानक बेहोशी आ जाना

घर के अंदर भी हो सकता है हीटस्ट्रोक का खतरा

हीटस्ट्रोक केवल बाहर धूप में काम करने वालों को ही नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहता है, पर्याप्त पानी नहीं पीता और डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है, तो घर के अंदर भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।

शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेत जैसे चक्कर आना, भ्रम की स्थिति, बोलने में लड़खड़ाहट या बेहोशी को गंभीर चेतावनी माना जाना चाहिए।


किन लोगों को ज्यादा जोखिम है?

कुछ वर्गों में हीटस्ट्रोक का खतरा अधिक होता है, जैसे:

  • बुजुर्ग और छोटे बच्चे
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित लोग
  • खुले में लंबे समय तक काम करने वाले मजदूर
  • ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी कर्मी और खिलाड़ी

दिमाग पर भी पड़ता है गंभीर असर

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी का प्रभाव सीधे मस्तिष्क पर पड़ सकता है। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से रक्त संचार प्रभावित होता है, जिससे चक्कर, मानसिक भ्रम, थकान और बेहोशी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

गंभीर मामलों में मरीज को दौरे पड़ने या कोमा में जाने का खतरा भी रहता है।


इमरजेंसी में क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति में हीटस्ट्रोक के गंभीर लक्षण दिखाई दें—जैसे शरीर का अत्यधिक गर्म होना, पसीना बंद हो जाना, तेज सांसें या बेहोशी—तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

डॉक्टर के पहुंचने तक ये कदम उठाएं:

  • मरीज को तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं
  • शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े या ठंडे पानी का उपयोग करें
  • यदि व्यक्ति होश में हो, तभी उसे पानी या ORS दें
  • बेहोशी की हालत में मुंह से पानी न दें

हीटस्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार सही सावधानियों से हीटस्ट्रोक से बचा जा सकता है:

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें
  • दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें
  • हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनें
  • कैफीन और शराब से परहेज करें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें

निष्कर्ष

भीषण गर्मी के इस दौर में शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। समय रहते सावधानी और सही कदम उठाकर हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

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