मलमास शुरू होते ही इस शहर से क्यों गायब हो जाते हैं सारे कौए? 33 करोड़ देवी-देवताओं से जुड़ी है रहस्यमयी मान्यता

Saroj kanwar
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बिहार का प्राचीन शहर राजगीर अपनी ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक महत्व और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां हर साल मलमास के दौरान एक ऐसी अनोखी घटना देखने को मिलती है, जो लोगों को हैरान कर देती है। कहा जाता है कि अधिक मास शुरू होते ही पूरे राजगीर में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता। आम दिनों में हर जगह नजर आने वाले कौए आखिर अचानक कहां चले जाते हैं, यह सवाल आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है।

स्थानीय लोग इस घटना को सतयुग से जुड़ी एक पौराणिक कथा से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि मलमास के समय राजगीर श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम बन जाता है। इस दौरान लगने वाला प्रसिद्ध मलमास मेला भी लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

मलमास में क्यों गायब हो जाते हैं कौए?

नालंदा जिले में स्थित राजगीर का नाम इतिहास और धर्म के कारण बेहद खास माना जाता है। लेकिन यहां की सबसे चर्चित मान्यता मलमास के दौरान कौओं के गायब होने को लेकर है। स्थानीय पंडितों और बुजुर्गों के अनुसार इसके पीछे एक प्राचीन कथा प्रचलित है।

मान्यता है कि सतयुग में भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा वसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में विशाल यज्ञ का आयोजन कराया था। इस यज्ञ में 33 करोड़ देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन भूलवश कौए को निमंत्रण नहीं दिया गया। इससे नाराज होकर कौओं ने राजगीर छोड़ दिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि हर मलमास में कौए इस क्षेत्र से दूर चले जाते हैं।

हालांकि इस घटना को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है, लेकिन स्थानीय लोग इसे आज भी गहरी आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

राजगीर के पवित्र कुंडों का रहस्य

राजगीर सिर्फ कौओं की रहस्यमयी कहानी के कारण ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद गर्म जलकुंडों और पवित्र जलधाराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण करवाया था।

कहा जाता है कि यज्ञ के दौरान देवी-देवताओं को स्नान करने में परेशानी हो रही थी। इसी वजह से अलग-अलग कुंड बनाए गए ताकि सभी देवता आसानी से स्नान कर सकें। वैभारगिरी पर्वत के आसपास स्थित गर्म जलकुंड आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

इनमें ब्रह्मकुंड सबसे अधिक प्रसिद्ध है, जिसे पाताल गंगा के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि इसका पानी हर मौसम में गर्म रहता है। इसे लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं और लोग इसे बेहद पवित्र मानते हैं।

मलमास मेले में उमड़ती है भारी भीड़

हिंदू धर्म में अधिक मास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद शुभ माना गया है। इसी कारण राजगीर में हर मलमास पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बिहार समेत देश के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

सुबह होते ही कुंडों के आसपास स्नान और पूजा करने वालों की भीड़ लग जाती है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मेले के दौरान राजगीर के बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिलती है। पूजा सामग्री, प्रसाद और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है।

आस्था और रहस्य का अनोखा मेल

राजगीर की यह अनोखी मान्यता आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कई पर्यटक खास तौर पर मलमास के दौरान यहां यह देखने पहुंचते हैं कि क्या सच में पूरे शहर में कौए दिखाई नहीं देते।

भले ही विज्ञान इस रहस्य का स्पष्ट जवाब न दे पाया हो, लेकिन आस्था रखने वाले लोग इसे चमत्कार और देवताओं के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि राजगीर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्य और लोकविश्वास का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

मलमास के दौरान कौओं का गायब होना, पवित्र कुंडों की मान्यताएं और देवी-देवताओं से जुड़ी कथाएं राजगीर को भारत के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि हर साल हजारों लोग यहां आस्था, इतिहास और रहस्य का अनुभव करने पहुंचते हैं।

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