बीते दो दशकों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। जिन्होंने लंबे समय तक गोल्ड में निवेश बनाए रखा, उन्हें शानदार मुनाफा हुआ। हालात ऐसे रहे कि 20 साल पहले लगाया गया 1 लाख रुपये आज करीब 15 लाख रुपये तक पहुंच गया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक ऐसा निवेश विकल्प भी रहा, जिसने रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया और निवेशकों की दौलत को 17 गुना तक बढ़ा दिया।
हाल ही में आई ‘फंड्सइंडिया’ (FundsIndia) की रिपोर्ट में पिछले 20 से 35 वर्षों के निवेश प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट बताती है कि सही एसेट में धैर्य के साथ किया गया निवेश लंबे समय में बड़ी संपत्ति बना सकता है।
सोने ने दिया दमदार रिटर्न
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में सोने ने औसतन 14.6% सालाना रिटर्न दिया। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी निवेशक ने 20 साल पहले गोल्ड में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू 15 लाख रुपये से अधिक होती। बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना निवेशकों के लिए मजबूत विकल्प बनकर उभरा।
अमेरिकी शेयर बाजार ने छोड़ा सोने को पीछे
हालांकि, रिटर्न की इस दौड़ में अमेरिकी शेयर बाजार सबसे आगे निकल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी इक्विटी मार्केट ने पिछले 20 वर्षों में औसतन 15.2% सालाना रिटर्न दिया। इस रफ्तार से 1 लाख रुपये का निवेश बढ़कर करीब 17 लाख रुपये तक पहुंच गया। यानी लंबे समय में विदेशी बाजारों ने गोल्ड से भी बेहतर प्रदर्शन किया।
भारतीय शेयर बाजार ने रचा वेल्थ क्रिएशन का इतिहास
अगर भारतीय बाजार की बात करें, तो निफ्टी 50 ने लंबी अवधि में शानदार रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल किया है। जुलाई 1990 से अब तक करीब 35 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने औसतन 13.2% CAGR रिटर्न दिया। इसका असर यह हुआ कि 35 साल पहले लगाया गया 1 लाख रुपये आज करीब 85 से 86 लाख रुपये बन चुका है।
वहीं पिछले 20 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारतीय इक्विटी मार्केट ने लगभग 11.4% सालाना रिटर्न दिया, जिससे निवेशकों का पैसा करीब 8.7 गुना बढ़ गया।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार
शेयर बाजार के अलग-अलग सेगमेंट में मिड-कैप कंपनियों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मिड-कैप शेयरों ने 20 वर्षों में 14.6% सालाना रिटर्न दिया और निवेश को 15 गुना तक बढ़ा दिया।
इसके अलावा, स्मॉल-कैप कंपनियों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। इन शेयरों ने औसतन 12.7% रिटर्न देकर निवेशकों की रकम को लगभग 11 गुना तक पहुंचाया। वहीं लार्ज-कैप शेयरों ने करीब 11.8% का रिटर्न दिया और पैसा लगभग 9 गुना बढ़ा।
FD और प्रॉपर्टी जैसे पारंपरिक निवेश रहे पीछे
जहां इक्विटी और गोल्ड ने शानदार कमाई कराई, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रियल एस्टेट जैसे पारंपरिक निवेश विकल्प काफी पीछे रह गए। पिछले 20 वर्षों में प्रॉपर्टी से औसतन केवल 7.9% सालाना रिटर्न मिला, जबकि डेट इंस्ट्रूमेंट्स और FD जैसे सुरक्षित विकल्पों का रिटर्न करीब 7.5% से 7.6% के बीच सीमित रहा।
लंबी अवधि का निवेश बना सफलता की कुंजी
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि शेयर बाजार में छोटी अवधि के लिए निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। 6 महीने से 3 साल के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव निवेशकों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन जिन लोगों ने 7 साल या उससे ज्यादा समय तक निवेश बनाए रखा, उन्हें इतिहास में बेहद कम बार नुकसान उठाना पड़ा और ज्यादातर मामलों में मजबूत रिटर्न हासिल हुआ।
निष्कर्ष
आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि लंबे समय तक धैर्य के साथ किया गया निवेश ही असली वेल्थ क्रिएशन का मंत्र है। सोने ने भले ही शानदार रिटर्न दिया हो, लेकिन इक्विटी मार्केट—खासतौर पर अमेरिकी और भारतीय शेयर बाजार—ने निवेशकों को उससे भी ज्यादा फायदा पहुंचाया। ऐसे में सही रणनीति और लंबी अवधि का नजरिया निवेश को बड़ी संपत्ति में बदल सकता है।