बहुत से नौकरीपेशा लोग यह मान लेते हैं कि उनकी पूरी सैलरी टैक्स के दायरे में आती है, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। आपकी सैलरी कई हिस्सों में बंटी होती है—जैसे बेसिक पे, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस आदि। इनमें से कई पर छूट या राहत मिल सकती है। इसलिए सिर्फ CTC देखकर टैक्स की गणना करना सही तरीका नहीं है। आइए समझते हैं कि ITR Filing 2026 के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा
सरकार सैलरीड कर्मचारियों को एक निश्चित स्टैंडर्ड डिडक्शन देती है, जिससे आपकी टैक्सेबल इनकम सीधे कम हो जाती है। इसके लिए किसी तरह के बिल या प्रूफ देने की जरूरत नहीं होती, यह ऑटोमैटिक राहत की तरह मिलता है।
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था का चुनाव
अब टैक्सपेयर्स के पास दो विकल्प होते हैं—ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम।
- पुरानी व्यवस्था में 80C, HRA, होम लोन जैसी कई छूटों का लाभ मिलता है
- नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब कम होते हैं, लेकिन अधिकतर छूट खत्म हो जाती हैं
कौन-सी व्यवस्था आपके लिए बेहतर है, यह आपकी सैलरी, निवेश और खर्चों पर निर्भर करता है। बिना तुलना किए चुनाव करना नुकसानदायक हो सकता है।
Form 16 क्यों है जरूरी
नौकरी करने वालों के लिए Form 16 एक अहम दस्तावेज होता है। इसमें आपकी पूरी सैलरी, कटे हुए TDS और लागू टैक्स डिडक्शन की जानकारी होती है।
ITR भरते समय यह काफी मदद करता है, लेकिन केवल इसी पर निर्भर रहना सही नहीं है क्योंकि अन्य आय भी जोड़नी पड़ सकती है।
टैक्स सेविंग निवेश के रिकॉर्ड संभालें
अगर आपने PPF, ELSS, जीवन बीमा, होम लोन या अन्य टैक्स सेविंग विकल्पों में निवेश किया है, तो उनके दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है।
गलत जानकारी देने या सबूत न होने पर आयकर विभाग बाद में सवाल कर सकता है।
साइड इनकम छिपाना पड़ सकता है भारी
आजकल कई लोग फ्रीलांसिंग, यूट्यूब, ट्रेडिंग, किराए या ब्याज से अतिरिक्त कमाई करते हैं। लेकिन इसे ITR में न दिखाना गलत साबित हो सकता है।
आयकर विभाग अब AIS जैसे डिजिटल सिस्टम से सभी वित्तीय लेनदेन ट्रैक करता है, इसलिए इनकम छिपाने पर नोटिस या पेनाल्टी का खतरा रहता है।
ITR फाइल करना जरूरी क्यों है, भले टैक्स न लगे
कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं बन रहा तो ITR भरने की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता।
ITR भविष्य में कई काम आता है जैसे—
- बैंक लोन लेना
- वीजा आवेदन
- इनकम प्रूफ दिखाना
पहले से करें टैक्स की प्लानिंग
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स बचाने की तैयारी आखिरी समय में नहीं, बल्कि पूरे वित्त वर्ष की शुरुआत से करनी चाहिए। इससे बेहतर निवेश और टैक्स सेविंग दोनों संभव हो पाते हैं।
नोट
(यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है। निवेश और टैक्स से जुड़े फैसले लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)