ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में केमिस्टों की हड़ताल, जानें किन जगहों पर उपलब्ध रहेंगी जरूरी दवाएं

Saroj kanwar
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देश में दवा व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन द्वारा ई-फार्मेसी के विरोध में एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि कई राज्यों के रिटेल फार्मेसी संघों ने इस बंद से खुद को अलग कर लिया है, जिसके चलते अधिकांश जगहों पर दवाओं की आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी।


हड़ताल का ऐलान किसने किया और क्यों?

देशभर के केमिस्ट और ड्रग डिस्ट्रीब्यूटरों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) इस हड़ताल के पीछे है। संगठन का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना सख्त नियमों और पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक दवा दुकानों के कारोबार पर असर पड़ रहा है।

AIOCD का आरोप है कि ऑनलाइन दवा बिक्री में पर्चे की सही जांच और नियमों का पालन पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो रहा, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।


कई राज्यों ने हड़ताल से बनाई दूरी

हालांकि AIOCD ने पूरे देश में बंद का आह्वान किया था, लेकिन कई राज्यों के रिटेल केमिस्ट संगठनों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।

पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख जैसे राज्यों के फार्मेसी संघों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी दुकानें खुली रखेंगे ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

इन संगठनों का मानना है कि दवाओं की उपलब्धता बाधित करना, खासकर गंभीर मरीजों के लिए, सही कदम नहीं होगा।


मरीजों को बड़ी राहत: सेवाएं रहेंगी जारी

देशभर में अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, सरकारी जन औषधि केंद्र और अन्य आवश्यक दवा केंद्र सामान्य दिनों की तरह काम करते रहेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई पर कोई असर न पड़े।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगर बड़े पैमाने पर दवा दुकानें बंद होतीं, तो अस्पतालों की सप्लाई चेन और मरीजों की दवा उपलब्धता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।


ई-फार्मेसी नियमों को लेकर क्या है विवाद?

यह पूरा विवाद सरकार द्वारा जारी दो नोटिफिकेशन (GSR 220(E) और GSR 817(E)) को लेकर है। केमिस्ट संगठनों की मांग है कि इन नियमों को वापस लिया जाए।

दरअसल, 2018 के ड्राफ्ट में ई-फार्मेसी के लिए रजिस्ट्रेशन, प्रिस्क्रिप्शन जांच और नियम तोड़ने पर पेनल्टी जैसे प्रावधान प्रस्तावित थे, लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

साथ ही, कोविड-19 के दौरान दी गई होम डिलीवरी की अनुमति का कई कंपनियों द्वारा विस्तार से उपयोग किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।


नियामक संस्थाओं का क्या कहना है?

भारत की दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) के अनुसार, मरीजों तक दवाओं की निर्बाध पहुंच सर्वोच्च प्राथमिकता है। संगठन का मानना है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और नियमन के जरिए किया जाना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।


निष्कर्ष

ई-फार्मेसी को लेकर चल रहा यह विवाद फिलहाल चर्चा में है, लेकिन हड़ताल के बावजूद देश के अधिकांश हिस्सों में दवा आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद है। कई राज्यों के संघों के अलग रुख के चलते मरीजों को राहत मिली है और स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

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