जम्मू-कश्मीर के ऊंचे और दुर्गम इलाकों में आतंकियों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमों ने राज्यभर के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य किसी भी तरह की घुसपैठ या छिपे हुए आतंकियों की गतिविधियों को रोकना है।
घुसपैठ की कोशिश के बाद बढ़ा अभियान
सूत्रों के अनुसार, 12 मई 2026 को नियंत्रण रेखा (LoC) पर हुई एक घुसपैठ की कोशिश को सुरक्षा बलों ने विफल कर दिया था। इस कार्रवाई में एक हथियारबंद घुसपैठिया मारा गया था। इसके बाद ही पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया और व्यापक स्तर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किए गए।
इस अभियान में भारतीय सेना की रोमियो फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस का स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) मिलकर काम कर रहे हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कुछ नए आतंकी समूहों की गतिविधियों की आशंका जताई गई है।
दुर्गम इलाकों में सघन सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बल मनकोट, मेंढर, कृष्णा घाटी और गुरेज सेक्टर जैसे संवेदनशील और कठिन इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। ये क्षेत्र अपनी भौगोलिक कठिनाइयों और घने जंगलों के कारण पहले भी सुरक्षा चुनौतियों के लिए जाने जाते रहे हैं।
कई रणनीतिक स्थानों पर सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर रखी है और “ब्लाइंड स्पॉट” माने जाने वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां से निगरानी मुश्किल होती है।
ड्रोन और आधुनिक तकनीक से निगरानी
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए ड्रोन, हवाई निगरानी और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे उन इलाकों की पहचान की जा रही है जहां संदिग्ध गतिविधियों की संभावना हो सकती है। सुरक्षा बलों की टीमें लगातार इलाके का नक्शा तैयार कर रही हैं और संभावित छिपने के ठिकानों की तलाश कर रही हैं।
सड़कों और चौकियों पर सख्त जांच
पूंछ और बांदीपोरा जिलों में प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा चौकियां (नाके) स्थापित की गई हैं। यहां से गुजरने वाले हर वाहन और व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को देने की सलाह दी गई है।
गर्मियों में बढ़ती सुरक्षा चुनौती
जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ पिघल रही है, पारंपरिक पहाड़ी रास्ते और दर्रे फिर से खुलने लगे हैं। इन मार्गों का उपयोग घुसपैठ के लिए किए जाने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा बलों ने गश्त और निगरानी और अधिक मजबूत कर दी है।