आम की बागवानी से हर साल होगी लाखों की कमाई, जानिए पौधों की सही दूरी और बेस्ट वैरायटीज

Saroj kanwar
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पारंपरिक खेती से मिलने वाले कम लाभ के कारण आजकल कई किसान बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें आम की खेती एक बेहद लाभदायक विकल्प बनकर उभरी है। सही तकनीक, बेहतर योजना और उन्नत किस्मों के चयन से किसान कम जमीन में भी अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं।

देश के कई किसान आधुनिक तरीकों से आम की बागवानी करके हर साल लाखों रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। इसकी सफलता का सबसे बड़ा राज सही किस्म का चुनाव और पौधों की उचित दूरी पर रोपाई है।


आम की बागवानी में सही किस्म का चुनाव क्यों जरूरी है?

अगर आप आम की खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सबसे पहले बाजार में मांग वाली किस्मों का चयन करना जरूरी है। सही वैरायटी न सिर्फ बेहतर उत्पादन देती है, बल्कि अच्छी कीमत भी दिलाती है।

किसानों के बीच कुछ लोकप्रिय और अधिक मांग वाली किस्में इस प्रकार हैं:

  • मालदा आम – स्वाद और खुशबू के लिए बेहद प्रसिद्ध, बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।
  • जर्दालू आम – अपनी मिठास और खास सुगंध के कारण यह किस्म प्रीमियम कीमत पर बिकती है।
  • आम्रपाली – हाइब्रिड किस्म, जो नियमित रूप से फल देती है और कम बीमारियों वाली होती है।
  • मल्लिका – उच्च गुणवत्ता वाली हाइब्रिड वैरायटी, जिसमें उत्पादन अच्छा और स्थिर रहता है।

इन किस्मों की खासियत यह है कि ये न केवल स्वाद में बेहतरीन होती हैं, बल्कि बाजार में इनकी बिक्री भी आसानी से हो जाती है, जिससे किसानों को स्थिर आय मिलती है।


पौधों की सही दूरी से बढ़ता है उत्पादन

आम की बागवानी में बेहतर उत्पादन के लिए पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। सही स्पेसिंग से पेड़ों को फैलने का पर्याप्त स्थान मिलता है और धूप तथा हवा आसानी से हर हिस्से तक पहुंचती है।

पारंपरिक तरीका

यदि आप पारंपरिक बागवानी अपनाते हैं, तो पौधे से पौधे और कतार से कतार की दूरी लगभग 10×10 मीटर (करीब 30 फीट) रखना उचित माना जाता है। इससे पेड़ों की वृद्धि संतुलित रहती है और उत्पादन बेहतर होता है।


हाई-डेंसिटी प्लांटेशन से ज्यादा कमाई का मौका

जिन किसानों के पास कम जमीन है और वे अधिक उत्पादन चाहते हैं, उनके लिए हाई-डेंसिटी (सघन बागवानी) तकनीक एक अच्छा विकल्प है।

इस तकनीक में आम्रपाली जैसी किस्मों को 5×5 मीटर की दूरी पर लगाया जा सकता है। इससे एक ही क्षेत्र में ज्यादा पौधे लगाए जा सकते हैं और उत्पादन भी बढ़ जाता है।

रोपाई के समय गड्ढों में जैविक खाद और नीम खली मिलाने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी वृद्धि तेजी से होती है। इससे फसल में रोगों का खतरा भी काफी कम हो जाता है।


निष्कर्ष

सही किस्म का चयन, वैज्ञानिक तरीके से पौधों की रोपाई और हाई-डेंसिटी तकनीक अपनाकर किसान आम की बागवानी से अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं। थोड़ी सी सही योजना और देखभाल के साथ यह खेती लंबे समय तक स्थिर और लाभकारी आय का साधन बन सकती है।

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