PM Modi Norway Visit: भारत-नॉर्वे के बीच हुए 12 बड़े समझौते, जानिए भारत को क्या-क्या फायदा मिलेगा

Saroj kanwar
5 Min Read

प्रधानमंत्री Narendra Modi की नॉर्वे यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों ही लिहाज से बेहद अहम साबित हुई। इस दौरे में भारत और नॉर्वे ने अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें “ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया। दोनों देशों के बीच कुल 12 बड़े समझौतों पर सहमति बनी, जिनसे भारत के क्लाइमेट, स्पेस, डिजिटल, इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने वाला है।

यह दौरा पीएम मोदी की पांच देशों—यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली—की यात्रा का चौथा चरण था। ओस्लो में उन्होंने द्विपक्षीय बैठकों के अलावा तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया।

आइए जानते हैं इस यात्रा से भारत को मिले 12 बड़े फायदे, आसान और दिलचस्प अंदाज में:

1. भारत-नॉर्वे बने ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनर्स’

दोनों देशों ने पर्यावरण और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने के लिए नई ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप शुरू की है। नॉर्वे की आधुनिक तकनीक और भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर ग्रीन एनर्जी, सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देंगी।

2. इंडो-पैसिफिक पहल में नॉर्वे की एंट्री

नॉर्वे अब आधिकारिक तौर पर इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) का हिस्सा बन गया है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, मुक्त व्यापार और सुरक्षित समुद्री मार्गों को मजबूती मिलेगी।

3. Nor-Shipping 2027 में दिखेगा भारत का दम

साल 2027 में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘Nor-Shipping’ कार्यक्रम में भारत अपना विशेष ‘इंडिया पवेलियन’ लगाएगा। इससे भारत को ग्रीन शिपिंग, शिपबिल्डिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक निवेश आकर्षित करने का मौका मिलेगा।

4. स्पेस सेक्टर में नया अध्याय

भारत की Indian Space Research Organisation और नॉर्वे की स्पेस एजेंसी के बीच अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच स्पेस रिसर्च और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा।

5. डिजिटल इंडिया को मिलेगा ग्लोबल सपोर्ट

भारत और नॉर्वे ने मिलकर ‘डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप’ शुरू की है। इसका उद्देश्य डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और ओपन डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देना है, जिससे भारत के साथ अन्य विकासशील देशों को भी फायदा मिलेगा।

6. हेल्थकेयर सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग

दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रिसर्च और नई मेडिकल तकनीकों के विकास के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है। इससे भारतीय स्वास्थ्य संस्थानों को एडवांस रिसर्च का लाभ मिलेगा।

7. टनल और हाईवे निर्माण में नॉर्वे की मदद

नॉर्वे भारत को कठिन और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षित टनल निर्माण, सड़क सुरक्षा और ढलान स्थिरता से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा। इससे भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक बनेंगी।

8. वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान

क्लीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और हेल्थ सेक्टर में संयुक्त रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के एक्सचेंज प्रोग्राम पर सहमति बनाई है।

9. CSIR और SINTEF के बीच सहयोग

भारत की Council of Scientific and Industrial Research और नॉर्वे की रिसर्च संस्था SINTEF मिलकर टिकाऊ विकास से जुड़ी तकनीकों पर काम करेंगी। इसमें कार्बन कैप्चर, बायो-बेस्ड मैटेरियल्स और ओशन्स एनर्जी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

10. महासागरीय ऊर्जा पर फोकस

ऑफशोर विंड और वेव एनर्जी जैसी समुद्री ऊर्जा तकनीकों को विकसित करने के लिए दोनों देशों ने विशेष समझौता किया है। इससे भारत के रिन्यूएबल एनर्जी मिशन को बड़ी ताकत मिलेगी।

11. शिक्षा और रिसर्च के लिए ग्रीन ट्रांजिशन फंड

भारत और नॉर्वे ने साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में ग्रीन ट्रांजिशन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाया है। इसके तहत छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी को संयुक्त रिसर्च और एक्सचेंज प्रोग्राम्स का मौका मिलेगा।

12. बड़े प्रोजेक्ट्स को मिलेगा एडवांस जियोसाइंटिफिक सपोर्ट

हैदराबाद स्थित CSIR-NGRI और नॉर्वे की Emerald Geomodelling AS के बीच हुए समझौते से भारत के रेलवे, हाईवे और डैम जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आधुनिक मैपिंग और जियोसाइंटिफिक सपोर्ट मिलेगा। इससे निर्माण कार्य अधिक सुरक्षित, तेज और कम लागत वाला बन सकेगा।

कुल मिलाकर क्या है सबसे बड़ा संदेश?

पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं रही, बल्कि भारत के ग्रीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए नए अवसरों का दरवाजा खोलने वाली साबित हुई। भारत और नॉर्वे की यह नई साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मजबूत कर सकती है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *