अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हालिया चीन यात्रा के बाद वॉशिंगटन में ताइवान को लेकर चिंता गहराने लगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ हुई मुलाकात के बाद ट्रंप के करीबी सलाहकारों को आशंका है कि चीन आने वाले वर्षों में ताइवान के खिलाफ आक्रामक कदम उठा सकता है।
Axios की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगले पांच सालों के भीतर ताइवान वैश्विक तनाव का बड़ा केंद्र बन सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर केवल एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सेमीकंडक्टर सप्लाई और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
बीजिंग बैठक के बाद बढ़ी रणनीतिक चिंता
जानकारी के मुताबिक, ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान माहौल बेहद दोस्ताना दिखाई दिया। शी जिनपिंग ने उनके स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए, जिनका ट्रंप ने भी खुलकर आनंद लिया। लेकिन अमेरिकी सलाहकारों का मानना है कि इस गर्मजोशी के पीछे चीन का एक सख्त भू-राजनीतिक संदेश छिपा हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग दुनिया को यह संकेत देना चाहते थे कि चीन अब सिर्फ एक उभरती ताकत नहीं, बल्कि अमेरिका के बराबर खड़ी वैश्विक शक्ति है। सलाहकारों का कहना है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
एक अधिकारी ने कहा कि बीजिंग वार्ता के बाद साफ संकेत मिले हैं कि ताइवान आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा टकराव बिंदु बन सकता है।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर मंडरा रहा खतरा
ताइवान दुनिया में एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स का सबसे बड़ा निर्माता माना जाता है। AI, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और आधुनिक टेक्नोलॉजी से जुड़े अधिकांश उपकरण इन्हीं चिप्स पर निर्भर करते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि यदि ताइवान को लेकर कोई सैन्य संघर्ष होता है, तो वैश्विक चिप सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका अभी चिप निर्माण के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है और काफी हद तक ताइवान पर निर्भर है।
एक सलाहकार ने चेतावनी देते हुए कहा कि आर्थिक दृष्टि से अमेरिका ऐसी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, क्योंकि टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की सप्लाई चेन अब भी ताइवान से गहराई से जुड़ी हुई है।
ताइवान के हथियार पैकेज पर ट्रंप ने नहीं लिया फैसला
चीन दौरे के दौरान ताइवान का मुद्दा बातचीत का अहम हिस्सा बना रहा। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ताइवान के लिए प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पैकेज में मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर शामिल हैं, जो कई महीनों से लंबित पड़े हैं।
ट्रंप ने साफ कहा कि वह चीन के साथ तनाव को और बढ़ाना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि अमेरिका को फिलहाल किसी दूरस्थ युद्ध में उलझने की जरूरत नहीं है।
वहीं, बीजिंग वार्ता के दौरान शी जिनपिंग ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के रिश्ते टकराव की दिशा में बढ़ सकते हैं।
ताइवान ने दोहराया अपना रुख
ट्रंप के बयान के बाद ताइवान ने एक बार फिर खुद को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बताया। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह द्वीप चीन के अधीन नहीं है और अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार सहायता दिए जाने का भी समर्थन किया और इसे सुरक्षा सहयोग का अहम हिस्सा बताया।
हालांकि अमेरिका आधिकारिक तौर पर “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करता है, लेकिन इसके बावजूद वॉशिंगटन ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और सुरक्षा साझेदार बना हुआ है।