केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर बड़ी तैयारी में है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे साल 2027 के मध्य के बाद लागू किया जा सकता है। ऐसे में देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी।
हाल ही में नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की 49वीं बैठक 11 मई को आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने की। इस अहम बैठक में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें पेंशन सुधार, पदोन्नति नीति, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल सुविधाएं और मेडिकल रीइम्बर्समेंट जैसे विषय शामिल रहे।
बैठक में व्यय विभाग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), रेलवे, रक्षा, स्वास्थ्य सहित कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। कर्मचारी संगठनों ने इस मंच का उपयोग लंबे समय से लंबित मांगों को तेजी से लागू करने के लिए दबाव बनाने के रूप में किया।
OPS (पुरानी पेंशन योजना) पर क्या हुआ बड़ा फैसला?
बैठक में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि 22 दिसंबर 2023 से पहले जारी हुई भर्तियों में चयनित कर्मचारियों को भी OPS का लाभ दिया जाए।
यूनियन की दलील थी कि अगर किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रशासनिक देरी की वजह से 2004 में हुई, जबकि भर्ती प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी, तो इसकी जिम्मेदारी कर्मचारी की नहीं मानी जानी चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पर DoE और DoPT ने सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर भी उठी मांग
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु 2003 या उससे पहले हुई हो और उसके परिजनों ने कट-ऑफ डेट से पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया हो, तो उन्हें भी OPS का लाभ दिया जाना चाहिए।
OPS और NPS में क्या फर्क है?
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को सरकारी कर्मचारियों के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती है।
इस योजना के तहत कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय उसकी अंतिम वेतन (Last Drawn Salary) का लगभग 50% पेंशन के रूप में मिलता है, जो आजीवन सुनिश्चित होता है।
वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) बाजार आधारित हैं। इनमें मिलने वाली पेंशन निवेश के प्रदर्शन और फंड के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे इसमें कुछ हद तक जोखिम बना रहता है।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग और OPS से जुड़ी चर्चाओं ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले लाखों लोगों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।