आधार कार्ड: केंद्र सरकार ने सरकारी योजनाओं के लिए आयु प्रमाण संबंधी आवश्यकताओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है। आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि अब किसी भी योजना का लाभ उठाने के लिए अंतिम और वैध प्रमाण नहीं रहेगी। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, पहचान के प्रमाण के रूप में केवल आधार कार्ड को ही मान्यता दी जाएगी।
केवल पारिवारिक रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि और शैक्षणिक प्रमाण पत्र ही वैध माने जाएंगे। पहले, योजनाओं के लिए पात्रता आधार कार्ड पर अंकित जन्मतिथि पर आधारित थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
दुरुपयोग की आशंका
केंद्र सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि अक्सर लोग स्वयं ही बता देते हैं, जिससे लाभ के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, अब आयु सत्यापन के लिए अन्य आधिकारिक दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और पात्रता की सटीक जांच सुनिश्चित हो सकेगी। फिलहाल, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और सामूहिक विवाह योजनाओं के लिए आधार कार्ड पर प्रदर्शित जन्मतिथि मान्य नहीं है।
पहले यह नियम था
जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पहले, केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं में पहचान और आयु दोनों के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड को स्वीकार किया जाता था। पात्रता का निर्धारण आधार पर दर्ज जन्मतिथि के आधार पर किया जाता था, जन्मतिथि का कोई अलग सत्यापन नहीं होता था।
अब, केवल शैक्षणिक प्रमाण पत्र या पारिवारिक पंजीकरण दस्तावेज़ ही वैध जन्मतिथि प्रदान करेंगे। जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए, केवल शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और पारिवारिक पंजीकरण में दर्ज जन्मतिथि ही वैध मानी जाएगी। ये दोनों जन्मतिथियां सरकारी अधिकारी द्वारा प्रमाणित होती हैं, जबकि आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि प्रमाणित नहीं होती है।
पारिवारिक पंजीकरण क्या है?
पारिवारिक पंजीकरण एक सरकारी दस्तावेज़ है जिसे ग्राम परिषद, नगर निकाय या स्थानीय प्रशासन द्वारा ग्रामीण और शहरी निवासियों के लिए रखा जाता है। इसमें परिवार के मुखिया सहित सभी परिवार के सदस्यों के नाम, आयु, रिश्ते, लिंग, जाति, व्यवसाय और मृत्यु की जानकारी होती है। इसे पारिवारिक पंजीकरण की प्रति या पारिवारिक पहचान पत्र भी कहा जाता है।