नई दिल्ली: अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान की हालत भी बेहद खराब है। ईरान के जवाबी हमलों के बाद पूरा मध्य पूर्व एक बड़े युद्ध की चपेट में आ गया है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। इज़राइल और ईरान दोनों लगातार हमले कर रहे हैं।
ईरान सऊदी अरब, कतर और कुवैत समेत कई अरब देशों में अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले कर रहा है। इज़राइली सेना तेहरान और बेरूत पर हमले जारी रखे हुए है, जिसमें ईरान के सरकारी प्रसारक पर हमला भी शामिल है। ईरान और लेबनान में मरने वालों की संख्या सैकड़ों में है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में अमेरिकी जमीनी बलों की संभावित तैनाती से इनकार नहीं किया। न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ एक फोन साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मुझे जमीनी स्तर पर सैनिकों की तैनाती से कोई आपत्ति नहीं है। जैसा कि हर राष्ट्रपति कहता है, ‘जमीन पर कोई सैनिक नहीं होंगे।’ मैं ऐसा नहीं कहता।”
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा और इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग लगाने की चेतावनी के बाद मध्य पूर्व का संकट और गहराता जा रहा है।
आईआरजीसी ने कुवैत के आरिफजान अड्डे पर 10 ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए हमलों की एक नई लहर शुरू करने का दावा किया है, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। उसने दावा किया कि ड्रोन ने अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा।
फॉक्स न्यूज ने बताया कि ईरानी ड्रोन हमले के समय रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास खाली था। उसने कहा कि इस घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।