सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ): भारत में सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश की बात करें तो, लाखों भारतीयों के लिए सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) एक सर्वोपरि विकल्प है। सरकारी गारंटी, निश्चित रिटर्न और कर-मुक्त लाभ के कारण यह लाखों भारतीयों की पहली पसंद बना हुआ है। हालांकि, इस निवेश की लोकप्रियता के साथ एक बड़ी गलतफहमी भी जुड़ी हुई है।
कई लोगों का मानना है कि अलग-अलग बैंकों या डाकघरों में कई पीपीएफ खाते खोलकर वे अपनी वार्षिक निवेश सीमा बढ़ा सकते हैं और अधिक कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप ऐसी योजना पर विचार कर रहे हैं, तो सावधान रहें। वित्त मंत्रालय के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, एक व्यक्ति अपने नाम से केवल एक पीपीएफ खाता संचालित कर सकता है। इस लेख में, हम विस्तार से जानेंगे कि इन नियमों का उल्लंघन आपके निवेश के लिए कैसे हानिकारक हो सकता है।
एक व्यक्ति, एक खाता
सार्वजनिक भविष्य निधि योजना 2019 के नियमों के अनुसार, एक भारतीय नागरिक अपने नाम से केवल एक ही पीपीएफ खाता खोल सकता है। चाहे आप निजी बैंक, सरकारी बैंक या डाकघर के माध्यम से निवेश करें, आपके नाम से केवल एक ही खाता मान्य है।
खाता खोलते समय फॉर्म 1 भरकर यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य है कि आवेदक का पहले से कोई अन्य पीपीएफ खाता नहीं है। यह नियम कर छूट के दुरुपयोग को रोकने और योजना की संरचना को सरल बनाए रखने के लिए लागू किया गया है। इसके अलावा, पीपीएफ में संयुक्त खाते खोलने की अनुमति नहीं है, जिससे यह पूरी तरह से व्यक्तिगत निवेश का साधन बना रहता है।
नाबालिग बच्चों के नाम पर खाते
सरकार माता-पिता को अपने नाबालिग बच्चों या मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के भविष्य के लिए उनके नाम पर पीपीएफ खाते खोलने की अनुमति देती है। हालांकि, यहां “एक बच्चा, एक खाता” नियम का सख्ती से पालन किया जाता है। इसका मतलब है कि दोनों माता-पिता एक ही बच्चे के नाम पर अलग-अलग पीपीएफ खाते नहीं खोल सकते।
बच्चे के खाते का संचालन केवल एक ही अभिभावक कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिभावक के रूप में, आप एक वित्तीय वर्ष में अपने और अपने नाबालिग बच्चे के खाते में अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं। यदि कुल जमा राशि इस सीमा से अधिक हो जाती है, तो अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।
विभिन्न बैंकों में खाते खोलने पर क्या होगा?
कई निवेशक मानते हैं कि विभिन्न संस्थानों में खाते खोलने से वे सिस्टम की पकड़ से सुरक्षित रहेंगे, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। आज के डिजिटल युग में, पीपीएफ खाते आपके पैन और आधार कार्ड से पूरी तरह से जुड़े होते हैं। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान या परिपक्वता के समय डेटा मिलान होने पर डुप्लिकेट खातों का तुरंत पता चल जाता है।
जैसे ही एक से अधिक खातों का पता चलता है, अतिरिक्त खातों को अमान्य घोषित कर दिया जाता है। वित्त मंत्रालय के नियमों के अनुसार, ऐसे अनियमित खातों में जमा की गई अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है, और केवल मूलधन ही वापस किया जाता है। इसका मतलब है कि वर्षों से उस खाते में पड़ा आपका पैसा बिना किसी लाभ के बर्बाद हो जाता है।
निवेश सीमा और सुरक्षा
पीपीएफ योजना का प्राथमिक उद्देश्य मध्यम और दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करना है। इसलिए, सरकार ने प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम निवेश सीमा ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख निर्धारित की है। यह सीमा योजना के वित्तीय संतुलन को बनाए रखने और उच्च आय वर्ग के लोगों को अनुचित लाभ उठाने से रोकने के लिए है।
यदि आपकी बचत इस सीमा से अधिक है और आप सुरक्षित निवेश चाहते हैं, तो सरकार सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र या ईएलएसएस जैसे अन्य विकल्पों पर विचार करने की सलाह देती है। केवल निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए निवेश ही भविष्य में चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ उठा सकते हैं।