होली 2026: शांति और समृद्धि के लिए रंगों से खेलने से पहले इन 3 वास्तु उपायों का पालन करें

Saroj kanwar
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होली वास्तु टिप्स 2026 – होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है; यह दिल जीतने, अतीत की कड़वाहट मिटाने और नई शुरुआत करने का अवसर है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष के पहले दिन, जब पूरी दुनिया रंगों से सराबोर होती है, तो हमारे आसपास की ऊर्जा बेहद खास होती है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन किए गए छोटे-छोटे बदलाव आपके घर से बुरी नजर और कलह को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं। ऋषिकेश स्थित ज्योतिषी अखिलेश पांडे के अनुसार, रंगों से खेलने की भीड़ से पहले, सुबह-सुबह इन तीन सरल कार्यों को करने से आपके घर में पूरे साल सकारात्मकता बनी रहेगी।

मुख्य द्वार का शुद्धिकरण: देवी लक्ष्मी का स्वागत होगा
वास्तु में घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। होली की सुबह स्नान करने के बाद, सबसे पहले एक बर्तन में गंगाजल लें और उसे अपने मुख्य द्वार पर छिड़कें। गंगाजल न केवल पवित्रता का प्रतीक है, बल्कि घर से नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है।
टिप: होलिका दहन करने के बाद, हल्दी या गुलाल से दरवाजे पर स्वास्तिक बनाएं। यह शुभता और समृद्धि का प्रतीक है, जो आपके घर में खुशियां लाता है।

होलिका दहन की राख: सुरक्षा कवच
होलिका की राख बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस राख में नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने की चमत्कारी शक्ति होती है।

क्या करें? होली की सुबह, होलिका दहन स्थल से थोड़ी राख लाएं और परिवार के सदस्यों के माथे पर तिलक लगाएं।

लाभ: ऐसा करने से बुरी नजर दूर होती है और मन को शांति मिलती है। कुछ लोग नकारात्मक शक्तियों को घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए इस राख को घर के कोनों में भी छिड़कते हैं।

बड़ों का आशीर्वाद: सफलता की पहली सीढ़ी

आज की व्यस्त जिंदगी में हम अपनी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, लेकिन यह उपाय सबसे कारगर है। किसी बाहरी व्यक्ति के साथ रंग बांटने से पहले, अपने परिवार के बड़ों से शुरुआत करें।

पहले भगवान को रंग अर्पित करें।

फिर अपने माता-पिता और बड़ों के पैर छुएं, उन्हें गुलाल (रंगीन पाउडर) लगाएं और उनका आशीर्वाद लें। यह क्यों महत्वपूर्ण है? ऐसा माना जाता है कि बड़ों का आशीर्वाद जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी दूर कर सकता है और आपके लंबित कार्यों में सफलता दिला सकता है।

क्या ये उपाय वाकई कारगर हैं?
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, त्योहारों के दौरान सामूहिक ऊर्जा बहुत अधिक होती है। इन समयों में किए गए शुभ कर्म, आध्यात्मिक विश्वास और सहज प्रभाव के माध्यम से मानसिक शांति और पारिवारिक एकता को बढ़ावा देते हैं। गंगाजल और हल्दी के उपयोग के पीछे वैज्ञानिक कारण इनके जीवाणुरोधी गुण हैं।

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