प्रेमानंद जी महाराज ने सफल वैवाहिक जीवन के रहस्य उजागर किए – महाराज जी कहते हैं कि जिस स्त्री ने आपका हाथ थामने के लिए सब कुछ त्याग दिया है, उसे प्रेम और सम्मान देना आपका सबसे बड़ा दायित्व है। यह महत्वपूर्ण क्यों है? एक पत्नी अपना घर, माता-पिता छोड़कर आपके परिवार को अपना लेती है। यदि आप उसे प्रेम भी नहीं दे सकते, तो वह मानसिक पीड़ा भोगती है।
परिणामस्वरूप: प्रेमहीन संबंध मात्र एक समझौता बन जाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी पत्नी हमेशा मुस्कुराती रहे, तो अपने व्यवहार में कोमलता लाएं।
आजकल, संदेह के कारण कई घर टूट रहे हैं। महाराज जी के अनुसार, विश्वास के बिना रिश्ता खोखला होता है। क्या करें? अपने शब्दों और कार्यों से अपनी पत्नी का विश्वास जीतें।
याद रखें: यदि विश्वास टूट जाए, तो न तो आपका धन और न ही आपका दिखावटी प्यार किसी काम का होगा। विश्वास ही वह धागा है जो दो अजनबियों को जीवन भर के लिए जोड़े रखता है।
- ईमानदारी ही बुद्धिमत्ता है
पति-पत्नी के बीच कोई पर्दा नहीं होना चाहिए। ईमानदारी का मतलब सिर्फ व्यभिचार न करना ही नहीं है, बल्कि हर छोटे-बड़े फैसले में पत्नी को शामिल करना भी है। गलतफहमियों को दूर करना: कई पुरुष सोचते हैं कि पैसा कमाने के कारण उन्हें अपनी पत्नियों को सब कुछ बताने की जरूरत नहीं है। महाराज जी कहते हैं कि पैसा सुख-सुविधाएं दिला सकता है, लेकिन सच्ची निष्ठा ईमानदारी से ही आती है। पत्नी को महत्व देना: जब आप उनसे सलाह लेते हैं, तो उन्हें महत्व महसूस होता है और रिश्ता गहरा होता है।
क्या महाराज जी ने सचमुच ऐसा कहा था?
जी हां, प्रेमानंद जी महाराज के कई वायरल वीडियो और सत्संगों (जैसे ‘राधा केली कुंज’ के आधिकारिक प्रवचनों) में उन्होंने गृहस्थ के कर्तव्यों के बारे में खुलकर बात की है। उनका मानना है कि विवाहेतर संबंध गंभीर पाप हैं और पुरुष को अपनी पत्नी को अपनी ‘शक्ति’ मानकर उनका सम्मान करना चाहिए। महाराज जी के शब्दों का सार यह है कि एक सफल विवाह केवल कागज़ पर आधारित नहीं होता, बल्कि प्रेम, विश्वास और ईमानदारी के त्रिकोण पर टिका होता है।