8th Central Pay Commission :8वें वेतन आयोग पर क्वांटइको रिसर्च की ताजा रिपोर्ट, कर्मचारियों को एकमुश्त मिलेगा एरियर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

Saroj kanwar
4 Min Read

8th Central Pay Commission 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के भुगतान में देरी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पडने वाला है प्राइवेट थिंक टैंक QuantEco Research की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस देरी से न केवल आर्थिक विकास और महंगाई का संतुलन बिगड़ेगा बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया RBI को वित्त वर्ष 2027 या 2028 की अंत में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर भी होना पड़ेगा।

इस रिपोर्ट में कहा गया है की 8वें वेतन आयोग के भुगतान में प्रशासनिक कारणों से देरी हो रही है अनुमान लगाया गया है कि भुगतान पहले शुरू हो जाएंगे लेकिन इन्हें लागू होने में कम से कम 1 साल और लगेगा । इस देरी के कारण सरकारी कर्मचारियो और पेंशन धारकों को  एकमुश्त एरियर के साथ भुगतान किया जाएगा जिसका असर आर्थिक विकास और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है खासकर कोर महंगाई (जो खाने पीने और ईंधन को छोड़कर सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को मापटी हैं) पर ज्यादा दबाव पड़ेगा क्योंकि इससे मांग बढ़ेगी और मकान के किराए में तुरंत ही इजाफा भी होना है

वेतन पेंशन में होगी बढ़ोतरी का असर

8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2 के करीब हो सकता है जो सातवें वेतन आयोग के 2.57 से कम है इससे न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए से बढ़कर 35,000-37,000 के बीच हो सकता है वेतन भत्तो और पेशन में संशोधन की कुल लागत 2 से 2.5 लाख करोड रुपए तक हो सकती है जो 7वें वेतन आयोग की एक लाख करोड रुपए की लागत से दुगनी से भी ज्यादा होती है इस बढ़ोतरी से सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन धारकों की जेब में ज्यादा पैसा आएगा जिससे उनके खर्च करने की क्षमता भी बढ़ना संभव है।

एकमुश्त मिलेगा एरियर का भुगतान

रिपोर्ट में बताया गया है कि एकमुश्त भुगतान और एरियर से शहरी क्षेत्र में उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा लोग कार इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और हवाई जहाज जैसी महंगी चीज और सेवाओं पर ज्यादा खर्च करेंगे यह एंगेल के नियम का वास्तविक उदाहरण है जिससे आय बढ़ाने पर लोग अपनी जरूरत से ज्यादा गैर जरूरी चीजो पर खर्च करते हैं  इसके अलावा बढ़ी हुई आय का एक हिस्सा बचत के रूप में बैंक डिपॉजिट या शेयर बाजार में निवेश के रूप में भी किया जाएगा

अर्थव्यवस्था पर पर असर

QuantEco Research का अनुमान है कि इस भुगतान से प्राइवेट फाइनल कंजमपशन एक्सपेंडिचर (PFCE) में सालाना 65 से 80 पॉइंट की बढ़ोतरी होगी जबकि जीडीपी ग्रोथ पर 40 से 50 बेसिक प्वाइंट का असर करना संभव है हालांकि राजकोषीय घाटा 0.6 फीसदी तक बढ़ सकता है सरकार को इस खर्च को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन बताने होंगे

रिपोर्ट में यह भीसुझाव दिया गया है कि 8वें वेतन आयोग के खर्च को पूरा करने के लिए सरकार के पास जीएसटी सुधारो को लागू करने का सुनहरा मौका है क्योंकि वित्तीय वर्ष चौथी तिमाही तक का मुआवजा उपकर खत्म होने की संभावना है।

इस बीच आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति MPC ने फरवरी से रिपो रेट में 100 बेसिक प्वाइंट की कटौती की है 6 अगस्त को हुई बैठक में समिति ने रिपो रेट को 5.5 फीसदी पर स्थिर रखा और तटस्थ रुख अपनाया साथ ही  चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 60 बेसिस प्वाइंट घटकर 3.1 फीसदी कर दिया।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *