सीटी स्कैन जांच में फर्जीवाड़ा, नियमों की अनदेखी

Saroj kanwar
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जांच में नोडल अधिकारी और कंपनी के बीच जानकारी में अंतर भी सामने आया। नोडल अधिकारी ने कहा कि आयुष्मान पोर्टल पर फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता, लेकिन सेंटर की कर्मचारी ने कहा कि मरीज का मोबाइल नंबर लेना काफी है।

कृष्णाचार्य डॉ. संतोष पटेल ने भास्कर को एक फर्जी फार्म दिखाया, जिसमें हस्ताक्षर फर्जी बताए गए। अब इस मामले की जांच होने जा रही है।

Bina News: सागर में जिला अस्पताल में ठेके पर सीटी स्कैन कराने वाली सिद्धार्थ एमआरआई एंड सीटी स्कैन प्राइवेट लिमिटेड के फर्जीवाड़े की परतें खुल रही हैं। नियम के अनुसार आयुष्मान या बीपीएल कार्डधारी मरीजों की फ्री जांच केवल तभी होनी चाहिए जब वे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती हों और डॉक्टर ने सीटी स्कैन लिखा हो। लेकिन कंपनी सीधे सेंटर पर आने वाले मरीजों का भी कार्ड लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी जिला अस्पताल की ओपीडी से पर्ची कटवाकर पहले से तैयार फार्म पर किसी भी डॉक्टर का नाम लिखकर फर्जी हस्ताक्षर कर देती है। डॉक्टरों ने भी कहा कि कई सीटी स्कैन जांचें काम की नहीं होतीं, क्योंकि स्लाइस कम होने से बीमारी पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मरीज को स्कैन फिल्म नहीं दी जाती, केवल रिपोर्ट दी जाती है।

जांच में नोडल अधिकारी और कंपनी के बीच जानकारी में अंतर भी सामने आया। नोडल अधिकारी ने कहा कि आयुष्मान पोर्टल पर फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता, लेकिन सेंटर की कर्मचारी ने कहा कि मरीज का मोबाइल नंबर लेना काफी है।

कृष्णाचार्य डॉ. संतोष पटेल ने भास्कर को एक फर्जी फार्म दिखाया, जिसमें हस्ताक्षर फर्जी बताए गए। अब इस मामले की जांच होने जा रही है।

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