प्याज किसानों को भारी घाटा, पांच माह स्टॉक के बाद भी नहीं निकली लागत

Saroj kanwar
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Mahu News: हासलपुर और आसपास के गांवों में किसानों की इस बार प्याज की खेती से हालत खराब रही। फसल तैयार तो हुई, लेकिन दाम इतने कम मिले कि लागत तक नहीं निकल पाई। मजबूरी में किसान गोदामों में रखा प्याज 2 से 12 रुपए किलो में बेच रहे हैं, जबकि प्रति बीघा लागत 55 से 60 हजार रुपए तक पहुंच गई थी।

कटाई के समय बाजार में रेट बेहद कम होने से किसानों ने उम्मीद में प्याज स्टॉक कर लिया कि आगे चलकर दाम बढ़ेंगे, लेकिन पांच महीने बाद भी हालात नहीं बदले।

गोदाम में रखने का खर्च और वजन में कमी से नुकसान और बढ़ गया। पांच माह स्टॉक रखने में प्रति बोरी 15 से 20 रुपए भाड़ा लगा। एक बोरी में करीब 50 किलो प्याज होता है, लेकिन इस दौरान 15 किलो सूख जाता है। ऐसे में मेहनत और पैसा दोनों ही बर्बाद हो गए।

किसान विष्णु मुलचंद यादव ने कहा कि सरकार केवल भाषणों में किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उद्योगों को राहत मिलती है, पर 80 प्रतिशत आबादी को रोजगार देने वाले किसानों के लिए ठोस नीति नहीं है।

हासलपुर, कुमठी, जाकुखेड़ी, चेनपुरा, राजपुरा कुटी, भीचौली, सिलोटिया, नांदेड़, पांजरिया और सीतापाट समेत कई गांवों के हजारों किसानों ने प्याज की खेती की थी, लेकिन सभी को घाटा झेलना पड़ा।

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