500 मीटर की दूरी में बनी दो गोशालाएं, दोनों में एक भी गोवंश नहीं मिला

Saroj kanwar
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जनवरी माह में मिनौरा में 100 गोवंश दिखाकर 62 हजार रुपए का भुगतान हुआ। इसी तरह रामनगर में 127 गोवंश दिखाकर 78 हजार से ज्यादा की राशि दी गई। पूरे जिले में जनवरी में 38 लाख से अधिक का भुगतान हुआ। अप्रैल, मई और जून के लिए भी 40 रुपए प्रति गोवंश के हिसाब से राशि तय की गई है।

जिले में 92 गोशालाओं को स्वीकृति मिली थी, जिनमें 72 संचालित बताई जा रही हैं। पशुपालन विभाग का दावा है कि सभी संचालित गोशालाओं में गोवंश रखे जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई गांवों में जाकर ही सामने आ रही है।

Tikamgarh News: टीकमगढ़ जिले की कई पंचायतों में गोशालाएं सिर्फ कागजों में संचालित हो रही हैं। ग्राम पंचायत रामनगर और खैरा में बनी दो गोशालाएं सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर हैं, लेकिन इनमें एक भी गोवंश नजर नहीं आया। रामनगर की गोशाला खुली पड़ी है और अंदर पुराना भूसा पड़ा है। वहीं खैरा की गोशाला का गेट टूटा है और वहां घास उग आई है। कोई देखरेख करने वाला भी नहीं है।

ग्राम पंचायत मिनौरा की गोशाला की हालत और खराब है। वहां जाने का रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भरा है। गांव वालों का कहना है कि वे कभी-कभी ही गोवंशों को अंदर करते हैं, नियमित देखरेख नहीं होती। फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में इन गोशालाओं में 100 से ज्यादा गोवंश दिखाए गए हैं।

जनवरी माह में मिनौरा में 100 गोवंश दिखाकर 62 हजार रुपए का भुगतान हुआ। इसी तरह रामनगर में 127 गोवंश दिखाकर 78 हजार से ज्यादा की राशि दी गई। पूरे जिले में जनवरी में 38 लाख से अधिक का भुगतान हुआ। अप्रैल, मई और जून के लिए भी 40 रुपए प्रति गोवंश के हिसाब से राशि तय की गई है।

जिले में 92 गोशालाओं को स्वीकृति मिली थी, जिनमें 72 संचालित बताई जा रही हैं। पशुपालन विभाग का दावा है कि सभी संचालित गोशालाओं में गोवंश रखे जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई गांवों में जाकर ही सामने आ रही है।

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