कार खरीदते समय अधिकतर लोग सबसे पहले यह देखते हैं कि उसमें कितने एयरबैग दिए गए हैं। आम धारणा यही है कि एयरबैग जितने ज्यादा होंगे, कार उतनी ही सुरक्षित होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही सुरक्षा सिस्टम कुछ परिस्थितियों में बिना किसी दुर्घटना के भी जानलेवा साबित हो सकता है?
हाल ही में मुंबई के पास मीरा रोड इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां 25 वर्षीय मोहित सोनी की मौत उनकी खड़ी कार में अचानक एयरबैग एक्टिव होने से हो गई। हैरानी की बात यह है कि वाहन पार्क था और किसी तरह की टक्कर नहीं हुई थी। सुरक्षा के लिए बनाया गया यही सिस्टम इस घटना में मौत का कारण बन गया।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
जानकारी के अनुसार, मोहित सोनी अपनी लगभग 15 साल पुरानी होंडा कार के अंदर बैठे थे। कार सड़क किनारे पार्क थी और वातावरण पूरी तरह सामान्य था। तभी अचानक बिना किसी चेतावनी के स्टीयरिंग व्हील का एयरबैग सक्रिय हो गया।
एयरबैग खुलने के दौरान उसका हार्ड प्लास्टिक कवर बेहद तेज गति से बाहर निकला और सीधे मोहित के गर्दन के दाहिने हिस्से से टकरा गया। चोट इतनी गंभीर थी और रक्तस्राव इतना अधिक हुआ कि उन्हें अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस जांच में वाहन के बाहरी हिस्से पर किसी भी प्रकार की टक्कर के निशान नहीं मिले।
बिना एक्सीडेंट एयरबैग क्यों खुल जाता है?
सामान्य रूप से एयरबैग तभी एक्टिव होता है जब वाहन को आगे या साइड से जोरदार टक्कर लगती है। लेकिन पुरानी गाड़ियों में तकनीकी खराबी के कारण यह सिस्टम गलत तरीके से भी ट्रिगर हो सकता है।
10 से 15 साल पुरानी कारों में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट, सेंसर डैमेज या वायरिंग की खराबी की वजह से एयरबैग अचानक खुलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा अगर वाहन में कभी पानी घुसा हो, तो सेंसर में जंग लग सकती है, जिससे गलत सिग्नल मिलते हैं और सिस्टम एक्टिव हो जाता है।
एयरबैग कैसे बन सकता है खतरा?
एयरबैग के अंदर एक नियंत्रित छोटा विस्फोट होता है, जिससे नाइट्रोजन गैस तेजी से निकलती है और बैग कुछ ही मिलीसेकंड में फूल जाता है। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि इसकी गति लगभग 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
अगर कोई व्यक्ति स्टीयरिंग के बहुत करीब बैठा हो या एयरबैग का कवर पुराना होकर सख्त और कमजोर हो चुका हो, तो खुलते समय यह किसी कठोर वस्तु की तरह गंभीर चोट पहुंचा सकता है। इसी तरह की स्थिति इस हादसे में भी सामने आई, जहां एयरबैग का प्लास्टिक कवर ही घातक साबित हुआ।
ऐसे हादसों से कैसे बचें?
इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए नियमित रूप से वाहन की सर्विसिंग बेहद जरूरी है। डैशबोर्ड पर दिखाई देने वाली Airbag Warning Light को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि यह संकेत जलता है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
पुरानी कारों के लिए अतिरिक्त सावधानी
अगर आपकी कार 10 साल से अधिक पुरानी है, तो एयरबैग सिस्टम की नियमित जांच किसी अधिकृत सर्विस सेंटर से जरूर करवाएं। पुराने वाहनों में सेफ्टी सिस्टम समय के साथ कमजोर हो सकते हैं।
साथ ही, ड्राइविंग या बैठने के दौरान हमेशा स्टीयरिंग व्हील से कम से कम 10 इंच की दूरी बनाए रखना चाहिए। इससे एयरबैग खुलने की स्थिति में गंभीर चोट का खतरा काफी कम हो जाता है।
थोड़ी सी सावधानी और समय-समय पर जांच आपकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है और ऐसे दुर्लभ लेकिन गंभीर हादसों से बचाव कर सकती है।