MP के इस गांव में डेम से बदली किसानों की किस्मत, स्ट्राबेरी और सेवफल तक उगाने लगे

Saroj kanwar
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MP News: धार जिले के जाबड़ा गांव में डुमाला डेम बनने के बाद किसानों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। यह गांव पहले बारिश पर निर्भर था, लेकिन अब यहां के खेतों तक पूरे साल सिंचाई का पानी पहुंच रहा है। इससे आदिवासी बहुल इस गांव के किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर स्ट्राबेरी, सेवफल, अनार, मिर्ची, प्याज और औषधीय फसलें उगाना शुरू कर दिया है।

डेम से जाबड़ा और आसपास के 600 हेक्टेयर से ज्यादा खेतों में सिंचाई हो रही है। इस बदलाव से खेतों की कीमतें भी बढ़ गई हैं और गांव को दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र तक पहचान मिली है। किसानों ने अपने खेतों तक 1 से 5 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई है। कुछ ने सौर ऊर्जा के लिए सोलर पैनल लगाए हैं और 20 लाख रुपए खर्च कर 6 निजी ट्रांसफार्मर भी लगवाए हैं।

2018 में 14.32 करोड़ रुपए की लागत से बने इस डेम का पानी अब सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर बढ़ाने और पेयजल संकट दूर करने में भी मददगार बना है। रत्तागिरी और सिमलावदी नदी पर बने इस डेम की क्षमता 3.15 मिलियन घन मीटर है, जिसमें 88 वर्ग किमी क्षेत्र से पानी आता है।रतलाम जिले के कुछ गांव जैसे पिपलोदी खेड़ा, बिरमावल और सलरियापाड़ा के खेतों को भी डेम से सिंचाई का लाभ मिल रहा है। जाबड़ा गांव की साक्षरता दर 87% है और अब यह गांव बाकी पंचायतों के लिए मिसाल बनता जा रहा है।

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